फतेहपुर (सं. भा.) : गर्मी दिनों दिन प्रचंड होती जा रही है। रविवार को आसमान से आग बरसी तो तापमान में खासा उछाल आया। बदन को झुलसा देने वाली गर्मी के चलते दोपहर के वख्त सड़कों में अभी से सन्नाटा चीरने लगा है। बाजारों में गर्मी के चलते भी प्रभाव पड़ने लगा है। गर्मी के चलते बीते 24 घंटे में पारा अधिकतम 42 तो न्यूनतम 25 डिग्री जा पहुंचा है।
बदलते हुए मौसम में गर्म हवाओं के थपेड़ों से आम जनमानस परेशान हो रहा है। हालात यह है कि गर्मी के चलते लोगों के चेहरे पल भर में लाल पड़ रहे हैं। 42 डिग्री सेल्सियस की गर्मी सहन नहीं हो रही है। सुबह पहर से तेज सूर्य की किरणों का एहसास भांपकर बचाव के साधन अंगौछा, छाता, चश्मा, टोपी आदि को जुटाकर चलते हैं। बाजारों में इनकी बिक्री भी बढ़ी है। दोपहर के वख्त लोग इनका बहुतायत प्रयोग करते हुए दिख जा रहे हैं। गर्मी के चलते बाजारों में ग्राहकों का टोटा दिखाई दे रहा है। दोपहर के बजाए शाम पहर ही खरीददारी की जा रही है। चौक बाजार जैसे इलाकों में दोपहर के वख्त बीते दिनों की तरह ग्राहक नहीं दिख रहे हैं। गर्मी का असर यह है कि लोगों की सेहत भी खराब हो रही है।
कष्टकारी साबित हो रही यात्राएं
बसों एवं ट्रेनों से यात्रा करके लौट रहे लोगों के चेहरे गर्मी हवाओं के थपेड़ों से लाल हो रहे हैं। यात्रा की समाप्ति पर वाहन छोड़ते ही यात्री सूखी गले तो तर करने के लिए ठंडा पानी अथवा पेय की दुकानों में जा खड़े होते हैं। वातानुकूलित सेवा का लाभ लेकर लौटने वाले जब स्टेशनों पर उतरते हैं तो उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ठसाठस भरी बसों में पसीने से तर-ब-तर यात्री देखने को मिल रहे हैं।
दोपहर के वख्त रिक्शा चालकों को नहीं मिलती सवारी
रेलवे और बस स्टेशनों में जब बस अथवा ट्रेन आती तभी सवारियां मिल रही है। इसके सिवा अन्य प्रमुख ठहराव वाली जगहों में दोपहर के वख्त सन्नाटा पसर जाता है। तमाम ई-रिक्शा चालक ऐसे हैं जो दोपहर के वख्त वाहन घर में खड़ा करके आराम करते हैं। चालक मो. हबीब, फारूख, दयाराम सिंह, राम किशोर यादव कहते हैं कि सुबह शाम का ही व्यवसाय रह गया है। दोपहर के वख्त रिक्शा भरना मुश्किल हो जाता है।


