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सर्राफा बाजार में कच्चा-पक्का पर्चे का खेल और जीएसटी चोरी का धंधा

फतेहपुर (प्रमोद श्रीवास्तव)। पीली और सफेद धातु यानी सोने और चाँदी के जेवरातो के कद्रदानों की दो-आबा की धरती में कभी कमी नहीं रही। ऐसे में इन जेवरातो का व्यवसाय करने वाले प्रतिष्ठानों की संख्या भी अच्छी-खासी होना लाजिमी है, किन्तु क्या इस रहस्य पर से कभी पर्दा उठ पायेगा कि सोने के जिन जेवरातो को पूरी कीमत पर बेंचा जाता है, उनमें तीस से 35 फीसदी तक मिलावट के गोरख-धन्धे से इस व्यवसाय से जुड़े व्यापारियों को सालाना करोड़ों का अतिरिक्त मुनाफा होता है। इसके अतिरिक्त लगभग समूचा व्यापार कच्चे पर्चो के सहारे चलता है। पक्का पर्चा माँगने वालो को इतनी पेचीदगियां बता दी जाती है कि वह थक जाता है और फिर एक बार कच्चे पर्चे के फेर में फंस जाता है…!

गौरतलब है कि जिले के ज्वैलर्स बड़े पैमाने पर जीएसटी घोटाले में लिप्त हैं! यहां के ज्वैलर्स सोने के जेवर खरीदने वालों को पक्का बिल नही देते हैं। पुरानी परंपरा के अनुसार यह ज्वैलर्स चाहते हैं कि वे सोने के जेवर को जिस कैरेट का कह दें, ग्राहक चुपचाप मान ले! पक्का बिल की जगह एक सादे कागज (कच्चा पर्चा) पर 22 कैरेट का नथिया या जो भी जेवर खरीदा गया उसका नाम और वजन लिख कर ज्वैलर्स ग्राहकों को थमा देते हैं। गांव के ज्यादातर लोग आज भी लेन-देन नगदी में करते हैं। त्यौहारी मौसम में गांव में भी लोग कीमती जेवरात खरीदते हैं। किसी के बहुत जोर देने पर किसी एक ज्वैलर्स के नाम लिए गए जीएसटी वाला बिल थमा देते हैं, जिसकें नाम पर अतिरिक्त चार्ज लिया जाता है और फिर भी खेल कर देते है। इस त्योहार में सोने की गिन्नी और चाँदी के सिक्को के साथ-साथ अन्य जेवरातो की गुणवत्ता को परखना भी जरूरी है…!

      सूत्रों की माने तो जिले के सर्राफा कारोबारी सालाना कई करोड़ रुपए का जीएसटी न भरकर सरकारी राजस्व के साथ खुलेआम धोखाधड़ी कर रहे हैं। अब सवाल यह उठता है क्या इस कर चोरी की जानकारी “सम्बंधित नियंत्रण तन्त्र” को नहीं है, इस सवाल पर कुछ जानकार सम्बंधित अधिकारियों की मिलीभगत की सँभावनाओ से भी इनकार नहीं करते। साथ ही समूचा सिस्टम सेट होने की बात कहते हैं।

एक उपभोक्ता ने बताया कि चौक (फतेहपुर) के एक प्रतिष्ठित सर्राफा प्रतिष्ठान से दो साल पहले दीपावली के मौके पर अपनी बेटी के लिये एक लाख तिहत्तर हजार का सेट (हार आदि) खरीदा था, दुकानदार ने कच्चा पर्चा दिया जिसमे ऊपर प्रतिष्ठान का नाम प्रिण्ट था, और घसीट राइटिंग में सिर्फ तौल, तारीख व धनराशि लिखी थी। बेटी के ससुराल (बहराइच) में अचानक कुछ आर्थिक जरूरत पड़ी तो उक्त जेवरात वहां के ज्वैलर्स के पास लेकर गये तो उसने पूर्व से सोने का रेट ज्यादा होने के बावजूद अधिकतम एक लाख रुपये में खरीदने की बात कहीं। क्योंकि पर्चे के नाम पर मामूली सी चिट थी, जिसमे क्या लिखा है, पढ़ना आसान नहीं था।

बेटी ने मायके में सम्पर्क किया और कैसे-तैसे सेट (जेवरात) भेजवाया तो वह स्थानीय सम्बंधित दुकानदार के पास लेकर गया तो किन्ही कारणों से उस दिन दुकान बन्द थी, तो एक अन्य बड़े प्रतिष्ठान में जाकर सामान दिखाया तो उसने बताया कि यह रेडीमेड माल है, इसमें साठ फीसदी ही माल होता है। मै तो इसी हिसाब से खरीदूँगा। उसने सलाह दी कि आप उसी दुकानदार के पास जाइये तो आपका नुकसान नहीं होगा। तीन दिन के इंतजार के बाद दुकान खुली और सामान दिखाया तो बीस फीसदी की कटौती करके अस्सी फीसदी में वापस लिया। सोचों अगर पक्का पर्चा होता तो दूसरे विकल्पो के जहां रास्ते खुलते वहीं क्या इतना बड़ा गड़बड़-झाला संभव था…! इस मण्डी से जुड़े एक अन्य जानकार बताते है कि चार बार अपने माल की अदला-बदली कर लीजिए तो आपका मूल चला जायेगा।

ऐसे कई और वाकये चौक की सर्राफा मण्डी के चर्चित है। इन दिनों त्यौहारी सप्ताह चल रहा है। दो दर्जन के करीब इन छोटी-बड़ी दुकानों में “रेडीमेड माल” बेहिसाब भरा पड़ा है। बेहिसाब सोना और चाँदी के जेवरातो का तगड़ा स्टॉक है, जिससे होने वाला मुनाफा भी बे-हिसाब संभावित है, जिस पर जीएसटी के अधिकारियों का ध्यान जाता है कि नहीं, यह देखने वाली बात होगी…! वैसे सिस्टम के जिम्मेंदार इस मद में गंभीर होंगे इसका विश्वास कम ही है। वैसे सम्बंधित अधिकारी ने अधिकृत वर्जन न छापने की गुजारिश करते हुए सिर्फ इतना कहा कि भरसक प्रयत्न होगा कि इस बार खेल न होने पाये…!

उधर इस जीएसटी घोटाले का पर्दाफाश करने के लिए परिवर्तन फाउंडेशन के मुखिया राज किशोर तिवारी कहते हैं कि जल्द जीएसटी कमिश्नर से शिकायत कर जिले के ज्वैलर्सो के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जायेगी।

*इसी कड़ी में उन्होंने बताया कि जिले के बिंदकी नगर के गांधी चौराहा स्थित सर्राफा बाजार में बहुत पुराने और बड़े-बड़े सोना-चांदी के जेवरों के विक्रेताओं की दुकानें हैं। यहां के ज्वैलर्स भी सोने के जेवर आदि खरीदने पर लोगों को पक्का बिल नही देते हैं। ग्राहक चाहे कितना भी बोले तो भी पक्का बिल देने से साफ मना कर देते हैं। इसके पीछे का इनका मकसद होता है जीएसटी की चोरी करना…! इसी तरह बिंदकी जहानाबाद ,खागा, हथगाँव, थरियाव, किशनपुर, धाता, असोथर, गाजीपुर, बहुआ, ललौली, हुसैनगंज, मलवा, चौडगरा, औंग, खजुहा, जहानाबाद, अमौली आदि में भी ज्वैलर्स न सिर्फ जीएसटी की चोरी कर रहे है, बल्कि सफेद व पीली धातु में मिलावट कर ग्राहकों से लूट जारी है…!

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