मुंबई (सं.भा.) मॉनसून की आहट के साथ ही मुंबई की जर्जर इमारतों में रहने वाले हजारों परिवारों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारी बारिश और तेज हवाओं के दौरान किसी भी अप्रिय घटना की आशंका के बावजूद खतरनाक घोषित की गई अधिकांश इमारतें अब भी खाली नहीं हो सकी हैं। ऐसे में प्रशासन की तैयारियों और लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
महाराष्ट्र गृहनिर्माण एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (म्हाडा) ने हाल ही में दक्षिण मुंबई और उपनगरों की 86 सेस इमारतों को अत्यंत जर्जर और जोखिमपूर्ण श्रेणी में रखा था। इन इमारतों में कुल 2,736 निवासी और व्यावसायिक इकाइयां संचालित हो रही हैं। हालांकि अब तक केवल 65 परिवारों और किरायेदारों ने ही वैकल्पिक व्यवस्था अपनाई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी इन खतरनाक भवनों में रहने को मजबूर हैं।
म्हाडा प्रशासन ने मॉनसून से पहले अभियान तेज करते हुए अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। प्रभावित परिवारों को ट्रांजिट कैंपों में स्थानांतरित करने के साथ-साथ वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी है। अधिकारियों का कहना है कि लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और जोखिम वाले भवनों को जल्द से जल्द खाली कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उधर, संभावित भूस्खलन, चट्टान खिसकने और मिट्टी धंसने जैसी घटनाओं को रोकने के लिए विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में संरक्षण दीवारों का निर्माण भी तेजी से किया जा रहा है। शहर और उपनगरों में स्वीकृत अधिकांश परियोजनाओं का काम पूरा हो चुका है, जबकि शेष कार्यों को मॉनसून के चरम दौर से पहले समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। बावजूद इसके, विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक जर्जर इमारतों में रह रहे लोगों का सुरक्षित पुनर्वास नहीं होता, तब तक हर तेज बारिश उनके लिए खतरे की घंटी बनी रहेगी।


