मुंबई, (सं.भा.)। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की पहचान मानी जाने वाली लोकल ट्रेन अब यात्रियों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। भीड़, भागदौड़ और तनाव के बीच मामूली कहासुनी भी अब हिंसक घटनाओं में बदलने लगी है। पिछले 18 महीनों में मध्य रेलवे के उपनगरीय नेटवर्क पर हिंसा की नौ घटनाएं सामने आने के बाद यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समाज बढ़ती असहिष्णुता, मानसिक तनाव और कानून के घटते भय के कारण ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां लोगों का धैर्य तेजी से खत्म हो रहा है।
हाल ही में चलती लोकल ट्रेन में एक प्रोफेसर पर जानलेवा हमले और मयंक लोहार हत्याकांड जैसी घटनाओं ने लोगों को झकझोर दिया। वहीं बुधवार रात से गुरुवार सुबह तक महज 12 घंटे के भीतर हिंसा की चार अलग-अलग घटनाओं ने स्थिति की गंभीरता को और उजागर कर दिया। जनवरी 2024 से अब तक मध्य रेलवे के उपनगरीय नेटवर्क पर इस तरह की कुल नौ घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं।
रोजाना 75 से 80 लाख यात्रियों का सफर कराने वाली मुंबई लोकल में अत्यधिक भीड़, समय पर पहुंचने की जल्दबाजी, आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव के कारण यात्रियों का धैर्य लगातार कम होता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पहले मामूली बहस तक सीमित रहने वाले विवाद अब मारपीट और जानलेवा हमलों का रूप ले रहे हैं।
मनोचिकित्सक डॉ. हमीद दाभोलकर के अनुसार यह केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि समाज के बिगड़ते मानसिक स्वास्थ्य का संकेत है। उनका कहना है कि लगातार तनाव, असहिष्णुता, भावनाओं पर घटता नियंत्रण, बढ़ती प्रतिस्पर्धा, आर्थिक-सामाजिक दबाव और कानून का कम होता भय मिलकर समाज को ऐसे ‘टिपिंग पॉइंट’ पर ले आए हैं, जहां लोगों की सहनशीलता तेजी से खत्म होती दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि अब यह समस्या केवल सामान्य डिब्बों तक सीमित नहीं है, बल्कि फर्स्ट क्लास और एसी लोकल जैसे डिब्बों में भी हिंसक घटनाएं बढ़ रही हैं।
सेंट्रल रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. स्वप्निल नीला ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा के दौरान संयम बनाए रखें और किसी भी विवाद या हिंसक घटना की जानकारी तुरंत रेलवे प्रशासन या रेलवे सुरक्षा बल को दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
लगातार बढ़ती हिंसक घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मुंबई लोकल में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता, मानसिक स्वास्थ्य और कानून के प्रति विश्वास को मजबूत करना भी समय की बड़ी आवश्यकता बन गया है।
मुंबई लोकल में टूट रहा संयम, बढ़ती हिंसा ने खड़े किए गंभीर सवाल
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