- स्वयंसेवकों ने 3 घंटे में 750 किलो कचरा साफ किया, प्रशासन 200 मामलों को सालों से “साफ” नहीं कर पाया।
विनय दूबे/भाईंदर
विश्व मैंग्रोव दिवस के अवसर पर समुद्र तटीय पारिस्थितिकी की रक्षा और मैंग्रोव वनों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से भाईंदर (पूर्व) स्थित जैसल पार्क चौपाटी में पर्यावरण संरक्षण का एक जोरदार संदेश दिया गया। महाराष्ट्र वन विभाग,फॉर फ्यूचर इंडिया,एवं मैंग्रोव फाउंडेशन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित सदाबहार वन(मैंग्रोव) स्वच्छता अभियान” में 100 से अधिक स्वयंसेवकों ने सदाबहार क्षेत्र व आसपास से प्लास्टिक, बोतलें और अन्य कचरा इकट्ठा कर कुल 750 किलो से अधिक कचरा हटाया।
- स्वच्छता अभियान के बाद उठा संरक्षण का मुद्दा
स्वच्छता अभियान के दौरान स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मीरा-भाईंदर क्षेत्र में सदाबहार वन संरक्षण से जुड़ी गंभीर चुनौतियों की ओर प्रशासन का ध्यान खींचा। अभियान में शामिल पर्यावरणकर्मी और वक्ताओं ने दावा किया कि मीरा-भाईंदर कोंकण क्षेत्र के ऐसे शहरों में से एक है जहां सदाबहार वनों के खिलाफ 200 से अधिक अवैध कटाई एवं विनाश के मामले दर्ज हैं, इसलिए 2005 से 2025 की अवधि में, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत एमबीवीवी पुलिस आयुक्तालय के कार्यक्षेत्र में दर्ज 200 से अधिक मामलों का स्वतंत्र विशेष लेखा-परीक्षण के साथ साथ और विशेष जांच कराए जाने की भी मांग फाउंडेशन द्वारा की गई है। साथ ही इन सभी मामलों में यह जांच हो कि कानून का सही तरीके से पालन हुआ या नहीं, जांच प्रक्रिया में कोई अनियमितता हुई या नहीं, तथा क्या किसी अधिकारी ने अपने कर्तव्यों में लापरवाही की या अधिकारों का दुरुपयोग किया—इन सभी प्रश्नों की गहन छानबीन की जाए।
कानून है, पर अमल नहीं…
सदाबहार वन संरक्षण के लिए संघर्ष कर रहे पर्यावरण कार्यकर्ता धीरज परब ने रोष जताते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण कानून का कड़ाई से पालन नहीं हो रहा। उल्लंघन हुए क्षेत्र में सम्बन्धित विभाग द्वारा पुनः सदाबहार पौधों का रोपण नहीं किया जाना भी गंभीर विषय है। अवैध कटाई, कचरा फेंकना और अतिक्रमण के मामलों में एफआईआर तो दर्ज हो जाती है, लेकिन आगे की बेहद धीमी जांच के चलते एक तरफ दोषियों के हौसले बुलंद हैं तो वहीं दूसरी तरफ शहर का मैंग्रोव क्षेत्र लगातार सिकुड़ रहा है।
- न्यायिक प्रक्रिया तेज करने की अपील
पूर्व नगरसेवक रोहित सुवर्णा ने प्रशासन से मांग की है कि सभी लंबित मामलों की पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराकर दोषियों के खिलाफ महाराष्ट्र मैंग्रोव संरक्षण अधिनियम, 2013 के तहत सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि शहर का समुद्री किनारा और तटीय सुरक्षा मैंग्रोव वनों पर निर्भर है और इनके विनाश से भविष्य में बाढ़ नियंत्रण और तटीय सुरक्षा के लिहाज से गंभीर खतरे उत्पन्न हो सकते हैं। उक्त अभियान में एमबीएमसी स्वच्छता विभाग सहित पाटकर कॉलेज (एनएसएस शाखा),एलआरएमसी कॉलेज (एनएसएस शाखा), रॉयल कॉलेज (एनएसएस शाखा) , तथा शहर के कई विद्यार्थी, पर्यावरणप्रेमी, युवा, सामाजिक संस्थाएँ और नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए।


