मुंबई (सं. भा.) देश में व्यापार करना आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार ने जन विश्वास विधेयक-2023 में संशोधन को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल का यह कदम प्रधानमंत्री का ‘इज ऑफ डूइंग बिजनेस’ पहल के तहत उठाया गया है। व्यापारियों के दैनिक कामकाज को आसान करने के उद्देश्य से 42 अधिनियमों के 183 प्रविधानों को या तो खत्म कर दिया जाएगा या उनमें संशोधन कर छोटी-मोटी गड़बड़ियों को अपराध की श्रेणी से हटा दिया जाएगा। जिन अधिनियमों में संशोधन किया जा रहा है, वे 19 मंत्रालयों से जुड़े हुए हैं। इनमें जेल की सजा से जुड़े कई प्रविधान भी शामिल हैं। इन संशोधनों को लागू किए जाने से मुकदमों का बोझ घटेगा इस संबंध में अधिसूचना जल्द जारी होने की उम्मीद है। व्यापारिक संगठनों ने सरकार की इस पहल का स्वागत किया है।
तनाव मुक्त होकर कर सकेंगे व्यापार
व्यापार महासंघ कॉन्फडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने प्रधानमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि सही में यह कदम ‘इज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के सपने को साकार करने की दिशा में अच्छा कदम है, इससे व्यापारी तनाव मुक्त होकर अपना व्यापार कर सकेंगे और लंबित मामले भी कम होंगे। कैट के महाराष्ट्र महामंत्री शंकर ठक्कर ने कहा कि हमारा संगठन पिछले कई वर्षों से इन बेतुके कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहा था। इनमें से कई कानून तो आजादी से पहले के हैं, जिनका अब कोई औचित्य नहीं है। सरकार ने सही दिशा में कदम उठाया है। व्यापारियों को बिना मतलब के कानूनी पचड़ों से मुक्ति मिलेगी और व्यवसाय करने में आसानी होगी। इन बेतुके कानूनों से संबंधित लाखों मुकदमें अदालतों में लंबित है, जिनका अब समाधान हो सकेगा।

७ महीनों से हो रहा था प्रयास
■ वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने लोकसभा में पिछले वर्ष 22 दिसंबर को यह विधेयक पेश किया था। फिर संसद की संयुक्त समिति समेत 19 मंत्रालयों संग विस्तृत चर्चा की गई। उसी माह दोनों सदनों में इसे पेश किया गया…
संसदीय समिति ने कारोबार तथा जीवनयापन सरल बनाने को बढ़ावा देने के लिए जन विश्वास विधेयक की तर्ज पर छोटे मामलों को अपराध श्रेणी से बाहर करने के लिए राज्यों को प्रोत्साहित करने का सुझाव दिया था। समिति ने कहा था कि सरकार को पिछली तिथि से प्रावधानों में संशोधन करना चाहिए।
■ इससे अदालतों में लंबित मामलों के निपटान में मदद मिलेगी। समिति ने यह भी सिफारिश की थी कि मुकदमों में वृद्धि से बचने के लिए जहां भी संभव हो, कारावास के साथ जुर्माने को हटाकर नियम का उल्लंघन करने पर मौद्रिक दंड लगाया जाए।
■ अपराध की गंभीरता के आधार पर मौद्रिक दंड को तर्कसंगत बनाने, भरोसे पर आधारित राजकाज को बढ़ावा दिया जाए।


