spot_img
Homeमहाराष्ट्रजलाशयों की सुरक्षा पर उठे सवाल, अब विशेषज्ञ करेंगे पड़ताल

जलाशयों की सुरक्षा पर उठे सवाल, अब विशेषज्ञ करेंगे पड़ताल

मुंबई (सं. भा.)। मुंबई की प्यास बुझाने वाले जलाशय कितने सुरक्षित हैं और भविष्य में इनकी संरचनात्मक मजबूती पर कोई खतरा तो नहीं मंडरा रहा है? इन सवालों का जवाब तलाशने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने छह प्रमुख जलाशयों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराने का फैसला किया है। इस वर्ष अपेक्षाकृत कमजोर मानसून के कारण महानगर को पानी उपलब्ध कराने वाले सात जलाशयों में कुल जलभंडार लगभग 94 प्रतिशत तक ही पहुंच पाया है। ऐसे में अगले मानसून तक मुंबईकरों को निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित करने की चुनौती के बीच प्रशासन ने बांधों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों की समिति जलाशयों की मौजूदा स्थिति, निर्माण संबंधी खामियों, पानी के दबाव और संभावित खतरों का आकलन करेगी। इस पूरी प्रक्रिया पर करीब 45 लाख 90 हजार रुपए खर्च किए जाएंगे। समिति को दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी, जबकि सुरक्षा मूल्यांकन का कार्य दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

महानगरपालिका के जल विभाग के अनुसार, तानसा, मोडकसागर, मध्य वैतरणा, पिसे, तुलसी और विहार जलाशयों की सुरक्षा जांच कराई जाएगी। इन सभी जलस्रोतों का मुंबई की पेयजल व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है। बांधों की दीवारों में संभावित दरारों, निर्माण ढांचे में आई कमजोरी, टूट-फूट और जलदबाव से उत्पन्न होने वाले जोखिमों की विस्तृत पड़ताल की जाएगी। जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि जलाशयों की वर्तमान स्थिति भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए कितनी सक्षम है। किसी बांध में तकनीकी खामी सामने आने पर उसके सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

जल विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, जलाशयों की सुरक्षा सीधे तौर पर मुंबई की जलापूर्ति से जुड़ी हुई है। किसी बांध में गंभीर संरचनात्मक समस्या उत्पन्न होने पर न केवल जलसंग्रह प्रभावित हो सकता है, बल्कि मरम्मत के दौरान पानी की आपूर्ति व्यवस्था पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है। इसलिए संभावित खतरों की समय रहते पहचान करना आवश्यक है। विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाएगा कि किन जलाशयों में तत्काल मरम्मत की जरूरत है और कहां अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए।

केंद्र सरकार के जलाशय सुरक्षा अधिनियम, 2021 के प्रावधानों के तहत यह मूल्यांकन कराया जा रहा है। राष्ट्रीय जलाशय सुरक्षा प्राधिकरण ने महानगरपालिका को स्वतंत्र विशेषज्ञों से बांधों की सुरक्षा जांच कराने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा नियुक्त कोंकण विभाग की जलाशय सुरक्षा मूल्यांकन समिति की सेवाएं ली जाएंगी। प्रत्येक जलाशय का अलग-अलग निरीक्षण किया जाएगा और उसकी तकनीकी स्थिति का विस्तृत आकलन कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। महानगरपालिका ने प्रति जलाशय निरीक्षण एवं मूल्यांकन के लिए 4 लाख 65 हजार रुपए निर्धारित किए हैं। इसके अतिरिक्त विशेषज्ञों के यात्रा, आवास और भोजन पर 3 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे।

मुंबई के कुछ जलाशय एक शताब्दी से भी अधिक पुराने हैं। तुलसी, विहार और पवई झीलों की उम्र लगभग 125 से 150 वर्ष बताई जाती है। इनकी संरचनात्मक मजबूती की जांच वर्ष 2005 में सरकारी जलाशय सुरक्षा संगठन द्वारा की गई थी। इसके बाद वर्ष 2019 में नाशिक की एक एजेंसी ने इन तीनों झीलों का स्ट्रक्चरल ऑडिट किया था। अब नए सिरे से होने वाली जांच में जलाशयों की वर्तमान स्थिति और भविष्य में संभावित जोखिमों का मूल्यांकन किया जाएगा।

गौरतलब है कि मुंबई जैसे विशाल महानगर की जलापूर्ति व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित और सुचारु बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी जिम्मेदारी है। मानसून के दौरान जलाशयों में जमा होने वाला पानी ही अगले वर्ष बारिश शुरू होने तक महानगर की जरूरतों को पूरा करता है। इस बार अपेक्षित मात्रा में जलसंग्रह नहीं होने से पानी के समुचित प्रबंधन का महत्व और बढ़ गया है। हालांकि 94 प्रतिशत जलभंडार होने से तत्काल जलसंकट की स्थिति नहीं मानी जा सकती, लेकिन जलाशयों की सुरक्षा में किसी प्रकार की लापरवाही भविष्य में गंभीर परेशानी खड़ी कर सकती है। यही कारण है कि महानगरपालिका संभावित खतरों की पहचान कर समय रहते आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करना चाहती है।

RELATED ARTICLES

Most Popular

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com