मुंबई (संवाददाता)। पुलिस अगर चाह ले तो ब़डा से ब़डा भाई हो या गल्ली मुहल्लों का उठाईगीर दादा सब के होश पाख्ता हो जाते हैं। अगर पुलिस हीं जनता के प्रति जावाबदेह न हो तो भाई या दादा क्या चोर उचक्के तक खुद को बादशाह समझने लगते हैं। ऐसा ही कुछ हाल इन दिनों मालवणी एक नंबर में देह व्यापार में लिप्त वेश्याओं का है। इन्हें मालवणी पुलिस का जरा भी डर नही है। यह डर क्यों नही हैं। क्या मालवणी पुलिस खुद उन्हें शह दे रही है। यह तो मालवणी पुलिस या पुलिस के आला अधिकारी ही ठीक से बता सकते हैं।
बता दे कि मालवणी एक नंबर स्थित राधा कृष्णा होटल से लेकर बेस्ट बस के स्टॉप तक इन वेश्याओं का रोज शाम को मेला लगा जाता है। इनके कारण क्षेत्र के रहनेवाली संभ्रांत परिवार की महिलाओं को कई बार शर्मसार होना प़डता है। ताजुब की बात यह है कि मालवणी पुलिस ने आखिर कार इन वेश्याओं के प्रति इतना नरम रुख क्यों अख्तियार कर रखा है। इन वेश्याओं को लेकर `संगठन भारत’ ने कई बार खबर प्रकाशित की है। आम लोगों को होने वाली दिक्कतों के बारे में लिखा है । खबर लिखे जाने के बाद मालवणी पुलिस दिखावे मात्र की कार्रवाई करती दिखती है परंतु दो-तीन दिन बाद ही स्थिति जस की तस बन जाती है। मालवणी पुलिस के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक दीपक फटांगरे को अंबोजवा़डी के लाइट चोरी करने वाले के जन्मदिन पर उसे केक खिलाना महत्वपूर्ण लगता है पर आम और शरीफ लोगों को इन वेश्याओं से होने वाली परेशानी उन्हें नही दिखाई देती है।


