मुंबई (सं. भा.) : राज्य में मरीजों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई 108 एंबुलेंस’ सेवा एक दशक में प्रदेश के एक करोड़ से ज्यादा मरीजों के लिए जीवनदायी साबित हुई है। 2014 से 2024 के बीच राज्य के एक करोड़ तीन हजार 446 नागरिकों ने 108 एंबुलेंस सेवाओं का लाभ उठाया है। इनमें हृदय रोग, दुर्घटना में घायल, गर्भवती महिलाओं समेत विभिन्न बीमारियों और हादसों से पीड़ित शामिल हैं। यह सेवा फोन के एक कॉल पर उपलब्ध हो जाती है।
राज्य सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान के साथ महाराष्ट्र आपातकालीन चिकित्सकीय सेवा (एमईएमएस) परियोजना 26 जनवरी, 2014 से शुरू की थी। इसके तहत महाराष्ट्र के किसी भी इलाके में टोल-फ्री नंबर 108 पर कॉल करके मुफ्त में एंबुलेंस मंगाई जा सकती है। इस परियोजना को शुरू हुए एक दशक यानी 10 वर्ष से अधिक का समय हो चुका है। इतने समय में प्रदेश में एक करोड़ तीन हजार 446 लोगों ने इस सेवा का लाभ उठाया, जिसमें मुंबई के करीब सात लाख लोगों का समावेश है। कोविड काल में 50,996 मरीजों को भी इस सेवा का लाभ मिला है।
महाराष्ट्र आवश्यक चिकित्सा सेवा विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, राज्य में ‘108 एंबुलेंस’ की 937 एंबुलेंस सेवा दे रही हैं। यह दो तरह से कार्य करती हैं- पहला कि तत्काल चिकित्सा उपचार प्रदान करना और दूसरा है कि राज्य के शहरी और दूरदराज के मरीजों को अस्पतालों तक पहुंचाना। अब यह सेवा राज्य सरकार संचालित करेगी क्योंकि ठेकेदारी के अंतर्गत सेवा मुहैया कराने वाली कंपनी का ठेका सरकार ने बढ़ाने से इनकार कर दिया है।
नाशिक के महाकुंभ मेला अवधि के दौरान 1,07,200 बीमार, पंढरपुर की वारी में 2,89,646 और गणेशोत्सव के दौरान 4,684 रोगियों को 108 एंबुलेंस की सेवा मिली थी। कोरोना के कठिन समय में भी जिला स्तर पर इस सेवा से संक्रमितों को बहुत फायदा हुआ था।
2014 से 2024 तक 10 वर्षों के दौरान राज्य में 108 एंबुलेंस में करीब 40,213 बच्चों का जन्म हुआ। 2018 में अधिकतम 11,141 बच्चों का जन्म एंबुलेंस में हुआ। 2022 में यह संख्या 1197 दर्ज की गई थी। इसके अलावा जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे 4,034 मरीजों की जान एंबुलेंस से समय पर अस्पताल पहुंचने से बची। वहां मरीजों को समय रहते वेंटिलेटर सुविधा मिली जिससे उनकी जान बच पाई थी।


