मुंबई (सं. भा.) : टीबी के इलाज में असरदार साबित होने वाली बेडाक्वीलीन दवा अब मासूमों की भी जान बचाएगी। दरअसल इस दवा का पेटेंट पाने के लिए जॉनसन ऐंड जॉनसन कंपनी ने आवेदन किया था। टीबी सर्वाइवर्स के एक समूह ने इसे चुनौती दी थी। पेटेंट की अर्जी खारिज हो गई और सर्वाइवर्स की जीत हुई है।
वयस्कों की तरह बच्चों के उपचार के लिए भी जॉनसन ऐंड जॉनसन कंपनी द्वारा बेडाक्वीलीन ड्रग का निर्माण किया गया है। बच्चों की दवा का पेटेंट पाने के लिए कंपनी ने ट्रेड मार्क रजिस्ट्री, भारत सरकार के पास साल 2019 में ही आवेदन किया था। इस बात की जानकारी मिलते ही टीबी सर्वाइवर्स के हक के लिए आवाज उठाने वाली सिविल सोसाइटी ग्रुप ऐंड टीबी सर्वाइवर्स ने साल 2020 में पेटेंट के खिलाफ आवाज उठाई और ट्रेड मार्क अथॉरिटी के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि कंपनी ने यह दवा इजाद नही की है। इसलिए उन्हें पेटेंट की मांग करने का हक नहीं है।

टीबी ऐक्टिविस्ट और पेटेंट को चुनौती देने वाले गणेश आचार्य ने बताया कि पेटेंट न मिलने से गरीब मासूम बच्चों को भी उक्त दवा का लाभ मिल सकेगा। यदि एक कंपनी के पास दवा का पेटेट रहता तो उसकी मोनोपॉली बन जाती है। दवा का दाम भी काफी होता है, जो कि गरीब मरीजों की पहुंच से बाहर हो जाता। जब कंपनी ने दवा का आविष्कार ही नहीं किया है, तो फिर पेटेट नही मिलना चाहिए। अब पेटेंट न मिलने से अन्य दवा कंपनी भी उक्त ड्रग बना सकेगी। जब अधिक कंपनियों इस दवा को बनाएंगी तो लोगो को दवा सस्ती मिलेगी। गौरतलब है कि वयस्को के लिए जब बेड़ाक्वीलीन आई थी और कंपनी के पास जब पेटेंट था, तब वह दवा 6 महीन के कोर्स के लिए करीब 400 यूएस डॉलर मे मिलती थी। एकाधिकार खत्म होने और अन्य कंपनियो के आने पर अब 80 से 90 डॉलर में 6 महीने का कोर्स पूरा होता है। हम ट्रेड मार्क रजिस्ट्री के उक्त निर्णय का स्वागत करते है। अब हर मासूमो को यह दवा कम दर में उपलब्ध होगी।


