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शैलेन्द्र साहित्य सरोवर की 338वीं काव्य गोष्ठी

  • विमल करो मन- बुद्धि को,रहो सदा अनुकूल

फतेहपुर (सं. भा.) । मुराइन टोला हनुमान मंदिर में शैलेन्द्र साहित्य सरोवर के बैनर तले एक सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन के पी सिंह कछवाह की अध्यक्षता एवं शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी के संचालन में हुआ । मुख्य अतिथि के रूप में मंदिर के महंत स्वामी रामदास उपस्थित रहे ।

काव्य गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए के. पी . सिंह कछवाह ने वाणी वंदना मे अपने भाव प्रसून प्रस्तुत करते हुए कहा-वंदन माता शारदे, अर्पित चंदन- फूल । विमल करो मन- बुद्धि को,रहो सदा अनुकूल
।।
कार्यक्रम को गति देते हुए आगे कविता पढी़- सत्ता पक्ष- विपक्ष मिल, करें नीति की बात ।
कुर्सी के हित शुभ नहीं, भारत मां से घात ।।

डा. सत्य नारायण मिश्र ने अपने भावों को एक छंद के माध्यम से कुछ इस प्रकार प्रस्तुत किया- जीवन परिवर्तनशील बहुत, स्थिरता का आभास नही ।
है उदय एक के जीवन में, तो अस्त अन्य का निहित कहीं ।।

दिनेश कुमार श्रीवास्तव ने अपने भावों को मुक्तक में कुछ इस प्रकार पिरोया-जय रामदूत अंजनि सपूत, जय पवनपुत्र, केशरिकिशोर ।
वानराकार रुद्रावतार, तन कोटि कुलिश सम अति कठोर ।।

शिव सागर साहू ने काव्य पाठ किया- भारत – नदी चिनाब मे,बना रेल पुल आर्च ।
सबसे ऊंचा जगत में, दुनिया का सरताज ।।

सुन्दरम सोनी ने काव्य पाठ किया- राष्ट्रविरोधी बढ़ रहे, बेच रहे ईमान ।
ढाते जुल्म गरीब पर,, करते हैं अभिमान ।।

प्रदीप कुमार गौड़ ने अपने क्रम में काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार भाव प्रस्तुत किये – है जल संकट की आशंका, सब मिलकर अथक प्रयास करो ।
जल के प्रयोग को सीमित कर,तुम इसके सब भंडार भरो ।।

काव्य गोष्ठी के आयोजक एवं संचालक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने अपने भाव एक गीत के माध्यम से कुछ यों व्यक्त किये- इस छोटे से जीवन में ही, कुछ ऐसा कर जाओ ।
जिससे याद करे यह दुनिया, अक्षय कीर्ति कमाओ ।।

कार्यक्रम के अंत में स्वामी जी ने सभी को आशीर्वाद प्रदान किया ।आयोजक ने आभार व्यक्त किया ।

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