मुंबई (सं.भा.) जल जीवन का आधार है और मुंबई जैसे महानगर में बढ़ती आबादी के साथ पानी की जरूरत भी लगातार बढ़ रही है। भविष्य में जलसंकट की स्थिति से निपटने के लिए हर संभावित स्रोत को सुरक्षित रखना जरूरी है। इसके बावजूद शहर के बड़ी संख्या में पुराने कुएं वर्षों से उपेक्षित पड़े हैं। मनपा के रिकॉर्ड के मुताबिक करीब 80 फीसदी कुएं अब इस्तेमाल के योग्य नहीं बचे हैं। ऐसे में मनपा ने इन्हें दोबारा उपयोगी बनाने की योजना पर काम शुरू किया है।
मनपा के अनुसार, वर्ष 2009 में मुंबई के 26 वार्डों में करीब 12,351 कुएं दर्ज थे। वर्ष 2026 के रिकॉर्ड में इनकी संख्या बढ़कर 17,457 हो गई है। हालांकि इनमें से अधिकांश की हालत खराब बताई जा रही है। लंबे समय से सफाई और जरूरी रखरखाव नहीं होने के कारण इनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।
पहले चरण में करीब 350 कुओं को फिर से उपयोग में लाने का फैसला किया गया है। इसके तहत गाद निकालने, सफाई करने और आवश्यक मरम्मत जैसे काम किए जाएंगे। प्रत्येक वार्ड में इसके लिए करीब 20 लाख रुपए तक की राशि उपलब्ध कराने की तैयारी है। वास्तविक खर्च कुएं की गहराई, आकार, पानी की उपलब्धता और उसकी मौजूदा स्थिति के आधार पर तय किया जाएगा।
जलसंकट की आशंका के बीच मनपा का यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि इतने वर्षों तक इन पारंपरिक जलस्रोतों की नियमित देखभाल क्यों नहीं हुई, यह सवाल भी उठ रहा है। समय पर रखरखाव किया जाता तो बड़ी संख्या में कुओं को दोबारा उपयोगी बनाने पर होने वाला खर्च बचाया जा सकता था। अब इनके पुनरुद्धार के साथ नियमित निगरानी और देखभाल की व्यवस्था करना भी मनपा के लिए जरूरी होगा।


