मुंबई (सं. भा.) नालों, खाड़ियों और मैंग्रोव क्षेत्रों में निर्माण का मलबा डालकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वालों की अब खैर नहीं। मुंबई में अवैध मलबा डंपिंग पर लगाम लगाने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने सख्त रुख अपनाया है। मलबा ढोने वाले वाहनों का निर्धारित पोर्टल पर पंजीकरण नहीं कराने पर बिल्डरों और ठेकेदारों को प्रतिदिन 25 हजार रुपये का जुर्माना भरना पड़ सकता है। शहर में निर्माण कार्यों से रोजाना करीब 8 हजार टन मलबा निकलता है। इसके उचित निस्तारण के बजाय कुछ ठेकेदार नियमों को ताक पर रखकर इसे नालों, खाड़ियों, मैंग्रोव, आर्द्रभूमि और जंगलों में फेंक देते हैं। इस पर रोक लगाने के लिए मनपा ने निगरानी व्यवस्था को सख्त करने की तैयारी की है।
बीएमसी के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन विभाग ने मलबे की ढुलाई और निस्तारण पर निगरानी रखने के लिए मलबा नियंत्रण एवं ट्रैकिंग सिस्टम पोर्टल बनाया है। इसके तहत मलबा परिवहन करने वाले सभी वाहनों का पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य है। नियमों के अनुसार, निर्माण कार्यों से निकलने वाले मलबे को केवल महानगरपालिका द्वारा अधिकृत स्थानों पर ही डाला जा सकता है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए मनपा पुलिस की भी मदद लेगी।
मनपा के अनुसार, अभी तक पोर्टल पर कुल 220 पक्षों ने पंजीकरण कराया है। इनमें 109 बिल्डर शामिल हैं। इनके अलावा मनपा के ठेकेदारों, सरकारी संस्थाओं और ट्रांसपोर्टरों ने भी पंजीकरण कराया है। प्रशासन ने मलबा ढुलाई से जुड़े अन्य बिल्डरों, ठेकेदारों और वाहन संचालकों से भी जल्द पंजीकरण कराने की अपील की है।
मुंबई में रोजाना बड़ी मात्रा में निकलने वाले निर्माण मलबे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करना पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से बेहद जरूरी है। अब देखना होगा कि बीएमसी की सख्ती अवैध डंपिंग पर कितनी प्रभावी रोक लगा पाती है और नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई कितनी नियमित होती है।


