वर्तमान समय परिस्थिति को दृष्टिगत रखते हुए, महामारी से व्याप्त भय, असंतोष, अवसाद कुंठा और ऑक्सीजन या प्राण वायु का अभाव का अभाव, तो इस समय में इस त्रासदी से कैसे उम्र आ जाए, हम जानते हैं कि समस्त भय ,तनाव और नकारात्मक विचार निम्न चेतना स्तर को अधिक प्रभावित करते हैं।
उच्च चेतना स्तर को नहीं, दया ,करुणा ,प्रेम, मैत्री, सद्भावना ,सकारात्मकता उच्च चेतना की उपलब्धि हैं, इसके लिए हमें अपना ऑक्सीजन स्तर और चेतना के स्तर में कैसे वृद्धि करें, इसका उपाय है, प्राणायाम, प्राणायाम में दो शब्द हैं, प्राण और आयाम प्राण का अर्थ है, जीवनी जीवन शक्ति या ऊर्जा श्वास के माध्यम से ऊर्जा को समस्त नाड़ियों में प्रवाहित करना, आयाम का अर्थ है, वृद्धि करना, चेतना को विस्तारित करना।
इस प्रकार प्राणायाम से तनाव, अवसाद ,क्रोध ईर्ष्या, हीन भावना नकारात्मक विचार धारा से मुक्ति मिलती है, तथा मन स्थिर और इच्छा शक्ति दृढ़ होती है ,ओर दीर्घायु की प्राप्ति होती है।
प्राणायाम द्वारा नाड़ी शोधन होने पर प्राणऊर्जा का प्रवाह सुषुम्ना नाड़ी में होली पर अनेक दिव्य शक्तियों की प्राप्ति होती है, एवं कुंडलिनी जागरण की प्रक्रिया प्रारंभ होती है। शरीर मन, और आत्मा में प्राणायाम से ही सामंजस्य स्थापित होता है, जिनको अभ्यास हो वह पूरक , कुम्भक, रेचक कर सकते हैं, अभ्यास न होने की स्थिति में गहरी श्वास अभी तक धीरे-धीरे लेनी है, धीरे-धीरे ही छोड़नी है, जिससे शरीर के ऑक्सीजन स्तर में वृद्धि हो, प्रात काल 4:00 से 6:00 प्रकृति में वायु तत्व की प्रधानता रहती है, यह समय प्राणायाम, ध्यान के लिए सर्वोत्तम है।
प्राणायाम गुप्त आंतरिक शक्तियों को जागृत करने की क्रिया है। प्राणायाम से चेतना प्रखर होती है, जितना प्रखर होगा, क्षमता का उतना ही अधिक विकास होगा, प्रसन्नता, क्षमता, कांति, शांति, सरलता मैं वृद्धि होकर अध्यात्म का मार्ग प्रशस्त होगा, यह आत्म की ओर गति का प्रथम प्रयास है।
–मनीषा चौधरी


