मुंबई (सं. भा.) : शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के सांसद संजय राउत ने महाराष्ट्र दिन के मौके पर एकबार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ जमकर निशाना साधा है। सांसद संजय राउत ने कहा कि इस देश ने पहली बार एक रोने वाले प्रधानमंत्री को देखा है। राउत ने कहा कि पीएम सभा में जाते हैं और लोगों को गालियों की लिस्ट दिखाते हैं। कहते हैं कि कांग्रेस ने मुझे 91 बार गाली दी है। संजय राउत ने कहा कि किसी प्रधानमंत्री की आलोचना का यह कोई पहला मामला नहीं है। इसके पहले भी देश पर शासन कर चुके पूर्व प्रधानमंत्री भी ऐसी आलोचना का शिकार हो चुके हैं। लेकिन वो इस तरह से कभी सार्वजनिक तौर पर नहीं रोये। राउत ने कहा कि जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री को भी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। जनता ने इंदिरा गांधी को चुनाव में करारी शिकस्त का स्वाद चखाया था। राजीव गांधी, नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह की भी आलोचना की गई थी। हालांकि, जनसभा में जाकर इस प्रकार कोई भी नहीं रोया और रो कर वोट नहीं मांगा। संजय राउत ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि यह बड़े आश्चर्य की बात है कि मौजूदा प्रधानमंत्री जनसभा में विलाप कर रहे हैं।

संविधान नहीं मन की बात पर भरोसा
संजय राउत ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को संविधान से ज्यादा ‘मन की बात’ में दिलचस्पी है। महाराष्ट्र को अस्थिर करके किसी भी तरह सत्ता में बने रहे की उनकी प्रवृत्ति है। संजय राउत ने कहा कि पीएम मोदी और अमित शाह को संविधान से उतना ही प्यार करना चाहिए था जितना उन्हें मन की बात से प्यार है। मन की बात की क्या जरूरत है? देश को रोजगार चाहिए। सत्यपाल मलिक द्वारा लगाए गए आरोप की जांच होनी चाहिए।
फिलहाल संविधान को बचाने की जरूरत है। लेकिन आप ‘मन की बात’ में अटके हुए हैं। मन बात क्या है? जन की बातें सुनिए। संजय राउत ने कोरोना में थाली बजाने की भी आलोचना की थी।

महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार को लेकर हमला
एकनाथ शिंदे पर हमला बोलते हुए संजय राउत ने कहा कि मौजूदा सरकार गैंडे की खाल की बनी हुई है। अगर सरकार के पास दिमाग और दिल होता तो पैसे के बल पर खारघर के मैदान में लू लगने से हुई 16 लोगों की हत्या का मामला नहीं दबा होता। इस मामले की जांच होनी चाहिए थी। सरकार को माफी मांगनी चाहिए थी। लेकिन यह सरकार पैसे और पावर के मद में चूर है।


