मुंबई (संवाददाता)। बंबई उच्च न्यायालय ने कहा कि कोई भी धार्मिक उत्सव कानूनी दायरे में ही मनाया जाना चाहिए. अदालत ने नगर निकायों से कहा कि वे अवैध पंडालों और ध्वनि प्रदूषण मानकों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करते वक्त धर्मनिरपेक्ष रुख रखें.
मुंबई हाईकोर्ट का निर्देश
न्यायमूर्ति ए. एस. ओक और न्यायमूर्ति ए. के. मेनन की पीठ ने यह टिप्पणी की. इससे पहले, ठाणे नगर निगम की तरफ से पेश वकील ने अदालत को बताया कि अवैध रुप से ख़डे किए गए पंडालों को गिराने संबंधी उसके आदेशों को त्योहार मनाने पर रोक की तरह देखा गया. वकील राम आप्टे ने कहा कि अदालत के आदेश और निगम द्वारा अचानक की गई कार्रवाई से कानून- व्यवस्था की स्थिती पैदा हो सकती है. इसे लोगों को त्योहार मनाने से रोके जाने के तौर पर भी देखा गया. न्यायमूर्ति ओक ने इस पर कहा कि त्योहारो को मनाने से कौन रोक रहा है? हमनें उनको कभी नहीं रोका…. हमारी कभी भी यह मंशा नहीं रही. हम सिर्फ यह कह रहे हैं कि त्योहार कानून के मुताबिक मनाए जाने चाहिए.


