मुंबई, (सं. भा.) महाराष्ट्र में दूसरे राज्यों के नंबर वाली ऐसी गाड़ियों की अब सड़कों पर सघन जांच होगी, जो लंबे समय से राज्य में चल रही हैं। परिवहन विभाग ने एक वर्ष से अधिक समय से मुंबई और महाराष्ट्र में इस्तेमाल हो रहे बाहरी राज्यों में पंजीकृत वाहनों की पहचान के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। इसके लिए आरटीओ की निगरानी टीमें, प्रवर्तन दल और उड़न दस्ते तैनात किए गए हैं। अभियान लगातार 12 दिनों तक चलेगा।
मोटर वाहन अधिनियम के तहत किसी दूसरे राज्य में पंजीकृत वाहन को महाराष्ट्र में 12 महीने तक चलाया जा सकता है। इसके बाद वाहन को महाराष्ट्र में ही रखना और इस्तेमाल करना है तो दोबारा पंजीकरण कराने के साथ लागू मोटर वाहन कर का भुगतान करना जरूरी है। परिवहन विभाग को आशंका है कि कुछ वाहन मालिक अधिक टैक्स से बचने के लिए वाहनों का पंजीकरण दूसरे राज्यों में करा रहे हैं। परिवहन आयुक्त राजेश नार्वेकर ने सभी आरटीओ और उप-आरटीओ कार्यालयों को ऐसे वाहनों का सत्यापन करने के निर्देश दिए हैं।
अभियान के दौरान मुंबई और एमएमआर के साथ औद्योगिक क्षेत्रों, व्यावसायिक इलाकों, आवासीय परिसरों और बड़े पार्किंग स्थलों पर विशेष नजर रखी जाएगी। अधिकारी वाहनों के दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाएंगे कि वाहन महाराष्ट्र में कितने समय से इस्तेमाल हो रहा है। नियमों का उल्लंघन मिलने पर पुनः पंजीकरण, बकाया कर की वसूली और जरूरत पड़ने पर वाहन जब्त करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है।
परिवहन विभाग ने महाराष्ट्र में वर्ष 2025-26 के दौरान डीलरों से बिके 5,664 महंगे वाहनों की भी अलग से जांच शुरू की है, जिन्हें महाराष्ट्र में बेचने के बाद दूसरे राज्यों में पंजीकृत कराया गया। इनमें लग्जरी कारों के अलावा स्पोर्ट्स कार, क्रेन, ट्रक और खुदाई मशीनें शामिल हैं। इन वाहनों की कीमत करीब 50 लाख से 3 करोड़ रुपये तक बताई गई है। आरटीओ अधिकारियों को इनके पंजीकरण दस्तावेज, मालिकों के पते और दूसरे राज्य में पंजीकरण कराने के कारणों की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही अस्थायी पंजीकरण से जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा रही है।


