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निरुपम को रास नहीं आ रही कृपा की सक्रियता

मुंबई (सं. भा.) : पूर्व गृह राज्य मंत्री व कांग्रेस नेता कृपाशंकर सिंह एक बार फिर पूरी ताकत के साथ राजनीति में सक्रिय हो गए हैं. राजनीति में हासिए पर चले गए कृपाशंकर सिंह क्लीन चिट मिलने के बाद सबसे बड़े उत्तरभारतीय नेता बन कर उभरे हैं. पूरे शहर में उनका सम्मान समारोह हो रहा है. यह मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम को रास नहीं आ रहा है. कृपा की सक्रियता से निरुपम परेशान हो गए हैं.

कृपा के सम्मान समारोह के जवाब में निरुपम ने संपर्क अभियान शुरू किया है, लेकिन निरुपम के कार्यक्रम से भीड़ नदारद है. गौरतलब है कि वर्ष 2014 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का पारंपरिक उत्तरभारतीय वोटर बीजेपी के साथ चला गया, जिसका खामियाजा कांग्रेस को हार के रूप में चुकाना पड़ा.

अगले चुनाव को देखते हुए कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व एक ऐसे नेता की तलाश में है जो उत्तरभारतीयों को दोबारा कांग्रेस से जोड़ सके. निरुपम को मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष बनाने के पीछे कांग्रेस की यही सोच थी कि वे उत्तरभारतीय मतदाताओं को जोड़ेंगे, जिसमें वे नाकाम रहे. इतना ही नहीं निरुपम ने मुंबई में खुद को एकमेव नेता के रूप में प्रोजेक्ट किया है, जिससे कांग्रेस के बड़े नेताओं में भारी नाराजगी है. हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के दौरे के समय पोस्टर से प्रदेश अध्यक्ष अशोक चव्हाण का फोटो गायब था. चव्हाण ने इसकी शिकायत राहुल गांधी से की थी. मोहन प्रकाश को हटाकर मल्लिकार्जुन खरगे को महाराष्ट्र का प्रभारी बनाए जाने से मुंबई कांग्रेस नेतृत्व में भी परिवर्तन की संभावनाओं की चर्चा शुरू हो गयी है.  जबकि क्लीन चिट मिलने के बाद राजनीति में पूरी तरह से कृपा सक्रिय हो गए हैं.

उत्तरभारतीयों में कृपा की बढ़ती स्वीकार्यता को देखते हुए केंद्रीय नेतृत्व उत्तरभारतीयों को कांग्रेस से जोड़ने के लिए उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दे सकता है. हाल के दिनों में जोगेश्वरी, अंधेरी व पनवेल में कृपा के सम्मान में समारोह हुआ, जबकि नालासोपारा में सम्मान समारोह होने वाला है.

इन सम्मान समारोहों में भारी संख्या में उत्तरभारतीय नेता व लोग शामिल हो रहे हैं, जबकि संजय निरुपम द्वारा सांताक्रुज के नजमा हेपतुल्ला हाल में आयोजित उत्तरभारतीय समाज स्ने ह बैठक में उतना रिस्पोंस नहीं मिला. इतना ही नहीं उत्तरभारतीय समाज के जो गैर राजनीतिक लोग हैं, उनमें भी निरुपम अपनी पहुंच नहीं बना सकें. उनके मुंबई अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस में अंदरूनी घमासान मचा हुआ है.

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