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नई पीढ़ी को बताएगा शिवाजी महाराज के आरमार की गौरवगाथा

प्रमोद कुमार, डोंबिवली (सं.भा.)छत्रपति शिवाजी महाराज के शौर्य, दूरदृष्टि और सागरी सामर्थ्य की गाथा अब एक भव्य स्मारक के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने की तैयारी है। कल्याण पूर्व के कचोरे-नेतीवली टेकड़ी परिसर में देश का पहला छत्रपति शिवाजी महाराज आरमार स्मारक बनाने की संकल्पना रखी गई है। प्रस्तावित स्मारक में महाराज की भव्य प्रतिमा के साथ उनके आरमार से जुड़ी ऐतिहासिक जानकारी और जहाजों की विशाल प्रतिकृतियां आकर्षण का केंद्र होंगी।

सांसद डॉ. श्रीकांत एकनाथ शिंदे ने इस प्रस्ताव को लेकर महापालिका प्रशासन को आवश्यक अध्ययन और नियोजन करने के निर्देश दिए हैं। कचोरे-नेतीवली टेकड़ी परिसर में उपलब्ध जमीन स्मारक के लिए उपयुक्त है या नहीं, उपलब्ध क्षेत्र कितना है, परिसर का विकास किस तरह किया जाए और स्मारक में नागरिकों के लिए कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, इसका विस्तृत अध्ययन करने को कहा गया है। इस संबंध में विधायक राजेश मोरे, महापौर हर्षाली चौधरी और महापालिका प्रशासन के साथ समीक्षा बैठक भी की गई।

छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित आरमार उनके सागरी सामर्थ्य और दूरदर्शी नीति का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है। इसी इतिहास को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित स्मारक को केवल प्रतिमा तक सीमित नहीं रखा जाएगा। यहां आरमार की स्थापना, जहाजों के प्रकार, समुद्री अभियानों, तत्कालीन नौसैनिक व्यवस्था और शिवाजी महाराज की सागरी रणनीति से जुड़ी विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने की योजना है।

स्मारक परिसर में आरमार में शामिल विभिन्न प्रकार के जहाजों की वास्तविक स्वरूप वाली विशाल प्रतिकृतियां तैयार करने की भी संकल्पना है। इसके माध्यम से नागरिकों, विशेष रूप से बच्चों और युवाओं को शिवाजी महाराज के नौसैनिक सामर्थ्य और समुद्री नीति की जानकारी प्रत्यक्ष रूप से मिल सकेगी। स्मारक के लिए जमीन, डिजाइन, परिसर विकास और आवश्यक सुविधाओं से जुड़े पहलुओं का अध्ययन पूरा होने के बाद आगे की योजना तैयार की जाएगी।

बैठक में स्थायी समिति सभापति मल्लेश शेट्टी, पूर्व नगरसेवक रवि पाटील, विश्वनाथ राणे सहित अन्य उपस्थित रहे। इस दौरान डोंबिवली में निर्माणाधीन संत सावळाराम महाराज स्मारक के कार्य की भी समीक्षा की गई। सांसद डॉ. शिंदे ने संबंधित अधिकारियों से काम की प्रगति की जानकारी लेते हुए इसे निर्धारित समय में पूरा करने के निर्देश दिए। स्मारक के लिए जमीन, निधि और आवश्यक मंजूरियां मिलने के बाद चल रहे कार्य को गति देने पर भी जोर दिया गया।

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