मुंबई (संवाददाता)। रक्त से प्लाज्मा अलग करने के लिए प्रत्येक जिले में फ़्राक्सीनेशन सेंटर शुरु करना विचाराधीन है, मुंबई के केईएम अस्पताल में फ़्राक्सीनेशन सेंटर प्रस्तावित किया गया है, यह जानकारी स्वास्थ्य मंत्री डॉ.दीपक सावंत ने दी। विधानसभा में विरोधी पक्ष नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत ब्लड बैंको की स्थिती पर सरकार का रुख जानना चाहा था।
विस में स्वास्थ्य मंत्री ने दी जानकारी
इसका उत्तर देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य में कुल ३२८ लाइसेंस धारक व पंजिकरण ब्लड बैंक हैं। इनके माध्यम से २०१६ में १५.७० लाख यूनिट रक्त संकलित किया गया था। जबकि राज्य को ११.२३ लाख यूनिट की जरुरत होती है। संकलित किये गये रक्त में से बेकार होने वाले रक्त के अलग – अलग कारण होते हैं। फिर भी निर्धारित प्रमाण १.८ प्रतिशत से कम रक्त बेकार जाता है।
उन्होंने कहा कि लाइसेंस धारक ३२८ बैंकों के माध्यम से रक्त संकलित किया जाता है।
इसमें ए-निगेटिव, एबी निगेटिव तथा ओ निगेटिव रक्त समूह का रक्त जरुरत के हिसाब से संकलित किया जाता है।
रक्त संकलन करने वाली संस्थाओं तथा बारबार रक्तदान करने वालों को प्रोत्साहन मिले इसके लिए सरकार योजना शुरु करनें पर विचार कर रही है।
राज्य में ब्लड बैंकों को केवल नो ऑब्जेक्शन प्रमाण पत्र दिया जाता है, उनको लाइसेंस देने का अधिकार अन्न व औषधि प्रशासन विभाग के पास है।


