ईश्वर ने हमें जीवन देने के साथ – साथ एक उपहार भी दिया है जो जल है , जिसके बिना इन्सान जीवित नहीं रह सकता । जिस प्रकार जीने के लिए सांसों की , हवा की आवश्यकता है उसी प्रकार जीने के लिए जल की । प्रत्येक प्राणी तक किसी न किसी रूप में जल पहुँचाने का प्रयोजन ईश्वर का ही है । जहाँ नदियाँ नहीं जातीं , वहाँ बादल जल पहुंचाते हैं । ग्लेशियर के रूप में जल को जमा करके रखना और नदियों के द्वारा जन – जन तक ईश्वर ही पहुँचाते हैं । सृष्टि का प्रारम्भ जल से ही माना गया है । सबसे अधिक जल का भण्डारण समुद्र के पास है । परन्तु यह जल मनुष्य सीधे रूप में काम नहीं ले सकता , क्योंकि उसका जल खारा है । यदि खारा समुद्र न हो तो वर्षा सम्भव नहीं । समुद्र का जल जब वर्षा बनकर बरसता है तो वह जल मीठा हो जाता है। संसार का कोई भी कार्य जल के बिना पूरा नहीं हो पाता , फिर भी उस अमूल्य जल के प्रति मानव इतना नादान बना हुआ है ? जल की बर्बादी करता है ? वर्तमान समय में जल संकट देश ही नहीं समूचे विश्व की समस्या बन गया है । विशेषज्ञों ने बताया है कि वर्षा जल का संरक्षण करके गिरते भूजल स्तर को रोका जा सकता है। भूजल पानी का महत्वपूर्ण स्रोत है और पृथ्वी पर होने वाली जलापूर्ति भूजल पर ही निर्भर करती है लेकिन इसका अंधाधुंध दोहन हो रहा है , जो भयावह खतरे का संकेत है। भूगर्भ विशेषज्ञों ने बताया कि जब जमीन के अन्दर पानी का उत्पलावन बल कम होने या समाप्त होने लगता है तो जमीन अंदर धंसने लगती है , उसमें दरारें पड़ जाती हैं , कहीं आग का गोला बन जाती है। यह सब पानी के अत्यधिक दोहन का कारण होता है। आजादी के समय देश में प्रतिवर्ष प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता 5000 क्यूबिक मीटर थी । अनुमान है कि वर्ष 2025 में यह 1500 क्यूबिक मीटर रह जायेगी क्योंकि आबादी लगभग 1.39 अरब हो जायेगी । बूँद – बूँद जल बचाकर भी हम बड़ी बचत कर सकते हैं। आप सोच रहे होंगे , कैसे ? अपने घरों की टोटियाँ ठीक से बन्द करने की आदत डालें क्योंकि एक टपकते नल से प्रति सेकेण्ड एक बूंद बर्बाद होने से एक माह में 760 लीटर पानी व्यर्थ में ही बह जाता है। बाल्टी में पानी लेकर नहाने से बचत होती है। सीधे नल से नहाने पर 90 लीटर पानी खर्च होता है और बाल्टी से 15 लीटर। सब्जियों या फलों को बर्तन में करके धोयें। इस पानी को आप अपने पौधों में दे सकते हैं। बर्तन बहते नल में न धोयें । बाल्टी में पानी लेकर धोएँ। शेविंग , ब्रश , मुँह धोते समय नल को खुला न छोड़ें । जरूरत होने पर ही किसी बर्तन या मग्गे में पानी लेकर प्रयोग करें । मार्ग में कोई भी नल खुला देखें तो तुरन्त बन्द करें। अगर नल खराब है तो नगर निगम में इसकी सूचना दें । राष्ट्रीय विकास में जल की महत्ता को देखते हुए जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। कहा गया है- जल संरक्षण कीजिये, जल जीवन का सार।जल न रहे यदि जगत में , जीवन है बेकार। समाज का एक व्यक्ति जागरूक हो जाये तो वह दूसरे को करेगा और श्रृंखला बढ़ती जायेगी । माना कि यह उपाय पर्याप्त नहीं है परन्तु हम और आप तो पहल कर ही सकते हैं अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए। आपका एक बूंद किया गया प्रयास अवश्य सार्थक होगा क्योंकि बूंद – बूंद से घड़ा भरता है और जल की एक बूंद ही जीवन है।
-नन्दिनी रस्तोगी ‘नेहा’


