श्रध्येय,
पाठक वन्धु,
भारत वर्तमान में एक लम्बे अर्से से अनेक प्राकृतिक-अप्राकृतिक आपदाओं से गुजर रहा है। इसके बावजूद भी भारत की गरिमा विदेशों में उत्तरोत्तर बढ़ती ही जा रही है, जो भारत की उन्नत राजनैतिक शैली का परिचायक है, जिससे कि भारत की प्रतिष्ठा का प्रसार स्वयमेव होता ही जा रहा है। इसका कारण भारत का समस्त राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक मोर्चां पर कुशलता पूर्वक समाधान निकाल लेना एवं समय रहते उसका उपयुक्त उपचार कर देना। देश व देश के बाहर से आने वाली अनेक आपदाएं सर उठाने व पांव पसारने के पहले ही ‘ॐ शान्ति ॐ’ कर दी जाती हैं। भारतीय मीडिया को भी बदनाम किया जा रहा है कि मीडिया भी पक्ष-विपक्ष में बंट गई है। अपनी विश्वसनीयता खो चुकी है। किंतु यह चिंतन का विषय है कि हमारी लोकतंत्रात्मक व्यवस्था में ही जब पक्ष-विपक्ष है तो मीडिया और नागरिकों में भी पक्ष-विपक्ष का होना स्वाभाविक है। हिन्दी साप्ताहिक ‘संगठन भारत’ भी भारतीय मीडिया ग्रुपों में से एक है, सर्वदा से ही पक्ष-विपक्ष की नीतियों से परे रहकर अखण्ड एवं समृद्ध भारत के सपने को साकार करने का समक्ष प्रयास कर रहा है।
‘संगठन भारत’ अपनी बारह वर्षीय प्रकाशन यात्रा को पूर्ण कर सफलता पूर्वक तेरहवें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, जिसका प्रथमांक आपके हाथों में है। श्रद्धेयो, ‘संगठन भारत’ अपनी १२ वर्ष की प्रकाशन यात्रा में अनेक राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक व सांस्कृतिक विवादों के दौर से गुजरा है, किंतु बिना किसी लाग-लपेट, मित्रता, शत्रुता, आकर्षण एवं प्रत्याकर्षण के समस्त विवादों व आपत्तियों के मध्य से गुजरता हुआ सर्वदा निर्लेप रहा है। विगत बारह वषाX में ‘संगठन भारत’ ने प्रकाशन के अतिरिक्त समाज हित में अनेक लोकोपयोगी कार्य भी किये हैं। लोकोपयोगी कार्यक्रमों का आयोजन मात्र स्थानीय स्तर पर ही नहीं बल्कि सहयोगी सामाजिक संस्था परिवर्तन फाउंडेशन के तत्वावधान में जरुरत मंद गरीब विद्यार्थियों को स्कूल यूनीफार्म, पाठ्य सामग्री, पुस्तकें एवं नोटबुक्स इत्यादि का नि:शुल्क वितरण भी किया है। इसके उद्देश्य देश में शिक्षा का विकास हो एवं सामान्य परिवारों के होनहारों को भी प्रतिक्षा-विकास का सुअवसर मिल सके।
‘संगठन भारत’ व परिवर्तन फाउंडेशन के संयुक्त प्रयास से गरीब महिलाओं को साड़ी, सिलाई मशीने व अनाज इत्यादि का भी नि:शुल्क वितरण किया जाता है। विभिन्न क्षेत्रों कवियों, लेखकों, समाज सुधारकों, उत्कृष्ट प्रशासनिक, अधिकारियों, पत्रकारों, विधिवेत्ताओं एवं लोकोपयोगी कार्य करने वाले राजनेताओं को पुरस्कृत व सम्मानित कर उन्हें गौरवान्वित करने का प्रयास भी किया है। ‘संगठन भारत’ की बुलंद आवाज को हमेशा ही उद्दीष्ट प्रतिसाद मिलता रहा है। मीडिया तो समाज का दर्पण है। यह भी सत्य है कि अपनी शोध पत्रकारिता की विधा से ‘संगठन भारत’ ने अनेक अनसुलझी गुत्थियों को उजागर किया है एवं अनेक सवालों को भी आईना दिखाकर समुचित जवाब व समाधान प्रदान किया है।
श्रद्धेय पाठकों, हमारे कहने का कोई खास मतलब नहीं है, क्योंकि आप ‘संगठन भारत’ की रग-रग से वाकिफ हैं। ‘संगठन भारत’ की भाषा, शैली, संघर्ष एवं उपलब्धियों से पूर्ण रुपेण वाकिफ हैं। ‘संगठन भारत’ एक अनुशासित समाचार पत्र समूह है। किसी भी परिणाम व दुष्परिणाम की चिंता किये बिना देश, समाज व राष्ट्रहित के लिए संघर्ष करता आया है और भविष्य में भी लोकहितार्थ संघर्ष करता रहेगा पाठकों को धन्यवाद! अबतक आपका उदात्त प्रेम व सहयोग ‘संगठन भारत’ को मिलता रहा है तथैव तेरहवें वर्ष भी आपका प्रेम व लगाव मिलता रहेगा इसका हमें पूर्ण विश्वास है।
धन्यवाद! साधुवाद! जय भारत!


