मुंबई (सं.भा.) बारिश के बाद जगह-जगह जमा पानी और बढ़ते मच्छरों ने मुंबईकरों की चिंता बढ़ा दी है। घरों और आसपास के इलाकों में मच्छरों की बढ़ती संख्या के बीच मच्छरजनित बीमारियों के मामले भी सामने आ रहे हैं। ऐसे समय में बीएमसी प्रशासन ने फॉगिंग के लिए जरूरी कीटनाशक खरीद को मंजूरी देकर मच्छर नियंत्रण अभियान को गति देने की तैयारी शुरू कर दी है। करीब 10 महीने से टेंडर प्रक्रिया में अटकी खरीद के कारण कई वार्डों में फॉगिंग प्रभावित होने की बात सामने आई थी।
बीएमसी की मच्छर नियंत्रण व्यवस्था में फॉगिंग के अलावा मच्छरों के प्रजनन स्थलों पर भी कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जाता है। टेंडर में देरी के कारण कई इलाकों में नियमित कार्रवाई प्रभावित हुई। इसी बीच महानगर में मच्छरजनित बीमारियों के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
बीएमसी के आंकड़ों के अनुसार, जून से सितंबर के बीच मुंबई में मलेरिया के 9,298 मामले सामने आए हैं। इस वर्ष मलेरिया से दो मरीजों की मौत भी हुई है। वहीं, 1 जून से 15 सितंबर के बीच डेंगू के 2,161 मामलों की पुष्टि हुई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 28 प्रतिशत अधिक है। इसी अवधि में चिकनगुनिया के 59 मामले भी दर्ज किए गए।
सितंबर के पहले पखवाड़े में भी मच्छरजनित बीमारियों का असर जारी रहा। 1 से 15 सितंबर के बीच मलेरिया के 1,499 और डेंगू के 598 मरीज सामने आए। अब कीटनाशक खरीद को मंजूरी मिलने के बाद बीएमसी के सामने प्रभावित इलाकों में फॉगिंग व्यवस्था को तेजी से सक्रिय करने और मच्छरों के प्रजनन पर प्रभावी रोक लगाने की चुनौती है।


