मुंबई का उतर भारतीय समाज हमेशा से ही ठगा जाता रहा है। फिर वह राजनीति की बात ही क्यों न हो। अभी दो दिन पहले ही मुंबई कांग्रेस की नई टीम घोषित हुई है, जिसमें उत्तर भारतीय समाज की घोर उपेक्षा हुई है। किसी भी उत्तर भारतीय नेता को इस टीम में शामिल नहीं क्या गया है। एक तरह से देखा जाए तो इससे मुंबई का प्रत्येक उत्तर भारतीय अपने को ठगा सा महसूस कर रहा है। मुंबई में उत्तर भारतीय लोगों की संख्या 40 लाख से भी अधिक है। इतनी बड़ी संख्या वाले समुदाय को कांग्रेस पार्टी ने नजरअंदाज कर लगता है अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारने का काम किया है। मुंबई कांग्रेस की नई कमेटी में उत्तर भारतीयों को प्रतिनिधित्व नहीं दिए जाने से न सिर्फ उत्तर भारतीय समाज बल्कि कांग्रेस पार्टी के उत्तर भारतीय कार्यकर्ता और नेता भी खासे नाराज बताए जा रहे हैं। मुंबई महानगर पालिका के आगामी चुनाव पर इसके विपरीत प्रभाव के बारे में कई उत्तर भारतीय कांग्रेसी नेता सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर इससे आगाह भी कर चुके हैं। कुछ उत्तर भारतीय नेताओं ने तो यहां तक कह दिया है कि उत्तर भारतीयों को पार्टी में प्रतिनिधित्व न दिए जाने से उत्तर भारतीय समाज को कांग्रेस पार्टी से और दूर कर सकता है। अगले साल मुंबई महानगर पालिका के चुनाव होने हैं। ऐसे में उत्तर भारतीय नेतृत्व की उपेक्षा कांग्रेस पार्टी को बहुत भारी पड़ सकती है। वैसे भी कांग्रेस पार्टी मुंबई में हासिए पर चली गई थी। कई दिग्गज उत्तर भारतीय नेता कांग्रेस को अलविदा कर या तो दूसरी पार्टी का दामन थाम चुके हैं अथवा स्वयं को राजनीति से अलग थलग कर चुके हैं। कांग्रेस पार्टी के इतिहास में यह पहली बार है जब मुंबई में उत्तर भारतीय समुदाय को पार्टी ने सिरे से नकार दिया है। यह विडंबना ही है कि पिछले कुछ वर्षों में मुंबई की राजनीति किसी सशक्त उत्तर भारतीय नेतृत्व की कमी महसूस की जा रही है। इधर कुछ वर्षों से मुंबई में कोई उत्तर भारतीय कद्दावर नेता नहीं है। ऐसे में यह कहना भी गलत नहीं होगा कि इस समय मुंबई का उत्तर भारतीय समाज नेतृत्व विहीन है। उसके पास ऐसा कोई राजनीतिक नेतृत्व नहीं है, जिसके सहारे वह अपने को यहां पूरी तरह सुरक्षित मान सके। मुंबई कांग्रेस की नई टीम से यहां का सामाजिक संतुलन बिगड़ गया है। पहली बार ऐसा हुआ है कि अल्पसंख्यक बहुसंख्यक पर भारी पड़ गए हैं। इतनी बड़ी जनसंख्या वाले उत्तर भारतीय दरकिनार कर दिए गए हैं। 15 लाख राजस्थानियों में से भी किसी को नई टीम में शामिल नहीं किया गया। देखा जाए तो कांग्रेस की नई टीम में हिंदी भाषी समाज की उपेक्षा मनपा चुनाव में कांग्रेस के लिए फजीहत का सबब बनने वाली है।


