मुंबई (सं. भा.)। कोरोना से पहले मुंबई मे मलेरिया, डेंगू व लेप्टो से बड़ी संख्या मे लोग संक्रमित होते थे और इसके चलते मौत का आंकड़ा भी ज्यादा होता था। लेकिन इस वर्ष कोरोना काल मे कि गई दवाओं का छिड़काव स्वच्छता अभियान इतना कारगर रहा की मलेरिया, डेंगू, लेप्टो से साल भर मे केवल १२ लोगों की मौत हुई है। एक तरफ मुंबई में कोरोना वायरस का खतरा बना हुआ है वहीं दूसरी तरफ एक साल की अवधि के दौरान मलेरिया, डेंगू और लेप्टो के कारण १२ लोगों की मौत हो गई। बीएमसी ने दावा किया है कि इस वर्ष पिछले साल की तुलना में इन रोगों से कम मौतें हुई है।
मुंबई में हर साल विभिन्न बीमारियों से पीिड़त मरीजों की संख्या में काफी वृद्धि होती है। परिणामस्वरुप कई लोगों की मृत्यू भी हो जाती है। वनंबर-दिसंबर में मलेरिया के ५४९ मामले, लेप्टोस्पायरोसिस के २४ मामले, डेंगू के ४८ मामले, गैस्ट्रोएंटेराइटिस के ७०० मामले, हेपेटाइटिस के ५२ मामले और एच १ एन १ के केवल ३ मामलों का पता चला था। आंकड़े बताते हैं कि इस दौरान किसी भी मरीज की मौत नहीं हुई।
कार्यकारी स्वास्थ्य अधिकारी मंगला गोमरे ने बताया कि मुंबई में कोरोना संक्रमण के मरीजों की संख्या रोजाना बढ़ती जा रही थी। कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए बीएमसी घर-घर जाकर लोगों के स्वास्थ्य की जांच कर रही थी। बीएमसी की तरफ से लागू किए गए ठोस उपाय योजनाओंसे कोरोना को नियंत्रित किया जा सका है। कोरोना वायरस के साथ ही लोग मलेरिया। डेंगू और लेप्टो से भी परेशान थे।
पिछले साल मलेरिया के ४९४८ मामलों में से केवल एक की मौत हुई। लेप्टोस्पायरोसिस के २४० मरीजों में से ८ और १२८ डेंगू के मरीजों में से ३ मरीजों की मौत हुई। २०१९ में लेप्टो के ११, डेंगू के ३, हेपेटाइटिस के १ और एच १ बी १ के ११ मरीजों की मौत हुई थी।


