मुंबई ( सं. भा.) आर्य समाज बोरीवली की ओर से डॉ. भारती संजीव श्रीवास्तव को “वैदिक साहित्य श्री” सम्मान प्रदान किया गया। सम्मान समारोह की अध्यक्षता उद्योगपति लालचंद तिवारी ने की। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि ख्यातिलब्ध हास्य कवि महेश दुबे थे। कवयित्री श्रीमती गायत्री पाण्डेय बतौर सम्माननीय अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। डॉ.भारती संजीव श्रीवास्तव को यह सम्मान उनकी सुदीर्घ साहित्य सेवा के लिए प्रदान किया गया। भारती जी का हिंदी भाषा के प्रति अटूट प्रेम रहा है। उनकी लेखनी में भाषा का संयम, भावों की गहराई और काव्य का संतुलन झलकता है। उनकी भाषा शैली मर्यादित, परिष्कृत और प्रभावशाली है। उनके पहले ही काव्य संग्रह ‘उसका सूरज’ को महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत किया जाना उनके साहित्यिक कौशल और संवेदनशील दृष्टि का प्रमाण है। हाल ही में उन्होंने मुंबई यूनिवर्सिटी से ‘निराला साहित्य में अभिव्यक्त जीवन दर्शन ‘ विषय पर पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की है। इस अवसर पर उन्होंने ने अपने शोध-यात्रा एवं रचना प्रक्रिया पर अपनी बात रखी। हास्य कवि महेश दुबे ने अपनी कविता के माध्यम से उपस्थित श्रोताओं को जमकर हँसाया। उन्होंने कहा, “हंसने और हंसाने वाला कभी स्वर्ग नरक में नहीं जाता क्योंकि वह जहां जाता है वही स्वर्ग बन जाता है।” श्रीमती गायत्री पाण्डेय ने नारी सम्मान में अपनी कविता पढ़ी। इस अवसर पर शालिनी जोशी, अनीता गोठवाल, मुन्ना यादव ‘मयंक’, संजीव श्रीवास्तव आदि गणमान्य उपस्थित थे। कार्यक्रम का संयोजन और संचालन कवि एवं आलोचक डॉ. जितेंद्र पाण्डेय ने किया। डॉ. पाण्डेय ने अध्यात्म और साहित्य की अभिन्नता पर अपनी बात रखी। संस्था के संस्थापक आचार्य प्रभारंजन पाठक ने उपस्थित श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
डॉ.भारती संजीव श्रीवास्तव को “वैदिक साहित्य श्री” सम्मान
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