मुंबई (सं.भा.): करीब पांच महीनों से बंद पड़ी मोनोरेल सेवा को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं। स्वदेशी तकनीक से तैयार मोनोरेक और नई सिग्नलिंग प्रणाली ने हालिया परीक्षण में सुरक्षा मानकों को सफलतापूर्वक पार कर लिया है, जिससे सेवा दोबारा शुरू होने की उम्मीदें तेज हो गई हैं।
देश में निर्मित मोनोरेक और उन्नत सिग्नलिंग प्रणाली थर्ड पार्टी यानी इंडिपेंडेंट सेफ्टी असेसर (आईएसए) के टेस्ट में पास हो गई है। मोनोरेक को सुरक्षा प्रमाणपत्र भी मिल चुका है। अधिकारियों के अनुसार, अब सरकारी इंजीनियर द्वारा अंतिम जांच प्रक्रिया शेष है, जिसके अगले दो महीनों में पूरा होने की संभावना जताई जा रही है।
तकनीकी खामी के कारण 20 सितंबर से मुंबई मोनोरेल सेवा अस्थायी रूप से बंद कर दी गई थी। इस अवधि में पूरे कॉरिडोर पर स्वदेशी मोनोरेक और नई सिग्नल प्रणाली की व्यापक जांच, ट्रायल रन और तकनीकी परीक्षण किए गए। मोनोरेल सेवा की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी, लेकिन शुरुआती वर्षों में रखरखाव की चुनौतियों और तकनीकी दिक्कतों से संचालन प्रभावित रहा। वर्ष 2017 में शॉर्ट सर्किट के चलते दो डिब्बों में आग लगने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे। साथ ही, अपेक्षाकृत कम यात्री संख्या के कारण आर्थिक दबाव भी बना रहा।
हालिया परीक्षण में मिली सफलता के बाद माना जा रहा है कि अंतिम निरीक्षण पूरा होते ही अगले दो महीनों में मोनोरेल सेवा फिर से शुरू हो सकती है। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि सुरक्षा मानकों के पूर्ण अनुपालन के बाद ही संचालन बहाल किया जाएगा।


