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भारत का गौरव: प्रथम महिलाएं

आज की महिला अपने अधिकारों के प्रति सजग है, जागरूक है। आज की महिला शिक्षित है, पढ़ी-लिखी है। अपने जीवन को अपने तरीके से जीने और अपने कैरियर को सफल बनाने में वह सक्षम है। वह आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी है। आज भारत की अनेकानेक महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा और कार्यक्षमता का लोहा मनवा रही हैं। इन प्रतिभावान, महत्वाकांक्षी, तेजस्वी महिलाओं का व्यक्तित्व व कृतित्व परिवार, समाज और देश के लिए सदा स्मरणीय व अनुकरणीय रहेगा। हम ऐसी ही कुछ भारतीय महिलाओं के बारे में चर्चा करेंगे, जिन्होंने अपनी उपलब्धियों से न सिर्फ अपना नाम रोशन किया बल्कि देश को गौरवान्वित भी किया है। इन महिलाओं द्वारा किए गए व किए जा रहे कार्य आज हमारे लिए प्रेरणा रुाोत बने हैं।

–अंतरिक्ष की उड़ान – कल्पना चावला (1.7.1961 – 1.2.2003)

भारतीय अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री और अंतरिक्ष शटल मिशन विशेषज्ञ कल्पना चावला अंतरिक्ष में उड़ने वाली पहली भारतीय महिला हैं। करनाल (हरियाणा) में पंजाबी हिंदू भारतीय परिवार में जन्मीं कल्पना चावला की प्रारंभिक शिक्षा टैगोर पब्लिक स्कूल, करनाल से शुरू हुई। उन्होंने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज, चंडीगढ़ से वौमानिक अभियांत्रिकी स्नातक की उपाधि प्राप्त की। टैक्सास विश्वविद्यालय (आर्लिंग्टन, संयुक्त राज्य अमेरिका) से वौमानिक अभियांत्रिकी में मास्टर ऑफ साइंस और कोलोराडो विश्वविद्यालय (बोल्डर) से वौमानिक अभियांत्रिकी में विद्या वाचस्पति की उपाधि प्राप्त कल्पना को सुप्रसिद्ध उद्योगपति और टाटा ग्रुप के चेअरमौन जे.आर.डी.टाटा से उड़ान भरने की प्रेरणा मिली। अंतरिक्ष यात्री बनने से पहले वे अंतरिक्ष मिशन नासा की वौज्ञानिक थीं। 1983 में वे एक उड़ान प्रशिक्षक और विमानन लेखक जीन पियरे हैरीसन से मिलीं और उनसे शादी कर 1990 में संयुक्त राज्य अमेरिका की नागरिक बनीं। कल्पना कोलंबिया अंतरिक्ष यान आपदा में मारे गए सात यात्री दल सदस्यों में से एक थीं।

-ओलंपिक में पदक – कर्णम मल्लेश्वरी

वर्ष 2000 के सिडनी ओलंपिक में कर्णम मल्लेश्वरी ने भारोत्तोलन में कांस्य पदक जीत कर पहली बार पदक तालिका में भारत का नाम जुड़वाया। कर्णम मल्लेश्वरी भारत की पहली महिला खिलाड़ी हैं जिन्हें ओलंपिक में पदक प्राप्त हुआ। आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम में जन्मीं कर्णम ने 12 साल की उम्र से ही भारोत्तोलन का अभ्यास शुरू कर दिया था। कर्णम मल्लेश्वरी को घ्अर्जुनङ, घ्खेल रत्नङ और घ्पद्यश्रीङ पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।

–केंद्रीय मंत्री – राजकुमारी अमृत कौर (2.2.1889 – 2.10.1964)

लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में जन्मीं गांधीवादी, स्वतंत्रता सेनानी और एक सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमारी अमृत कौर प्रथम भारतीय महिला हैं, जिन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में गठित पहले मंत्रिमंडल में वे केंद्रीय मंत्री थीं। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय का कार्यभार 1957 तक संभाला। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की स्थापना में उनकी प्रमुख भूमिका रही।

-ट्रेन चालक – सुरेखा यादव

भारत में ट्रेन चलाने वाली पहली महिला ट्रेन चालक सुरेखा यादव ने मध्य रेल की सबसे प्रतिष्ठित डेक्कन क्वीन चलाकर अपने नाम एक नई उपलब्धि दर्ज करा ली है। 1989 में सहायक चालक के तौर पर रेलवे की नौकरी शुरू करने वाली सुरेखा ने कराड के गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग का डिप्लोमा प्राप्त किया है। शुरू में घाट ड्राइवर, सहायक चालक, ग्रेड ए शंटर, गुड्स चालक, मोटरवूमेन होते हुए अब सुरेखा मेल एक्सप्रेस चालक के तौर पर काम कर रही हैं।

-डॉक्टर – आनंदी बाई जोशी (31.3.1865 – 26.2.1887)

पुणे में जन्मीं आनंदी बाई जोशी प्रथम भारतीय महिला हैं, जो डॉक्टर बनीं। उस दौर में, जब महिलाओं का शिक्षा से कोई सरोकार नहीं था, उन्होंने विदेश जाकर डॉक्टर की डिग्री हासिल कर एक मिसाल कायम की। आनंदी बाई जोशी का व्यक्तित्व महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं। आनंदी का विवाह 9 साल की अल्पायु में उनसे करीब 20 साल बड़े गोपालराव से हुआ। जब वे 14 साल की थीं, माँ बन गर्इं। अपनी इकलौती संतान की, जन्म के बाद 10 दिनों में ही, मृत्यु का उन्हें गहरा सदमा लगा और उन्होंने डॉक्टर बन ऐसी असमय मौत को रोकने का प्रण किया। एक शादीशुदा हिन्दू स्त्री के विदेश जाकर पढ़ाई करने की समाज में काफी आलोचना हुई। परंतु दृढ़ निश्चयी आनंदी ने उन आलोचनाओं की परवाह किए बिना अपने सपने को 1886 में पूरा किया, परंतु 22 वर्ष की अल्पायु में ही उनकी मृत्यु हो गई।

-डीजे – कैरी

कैरी, भारत की पहली महिला डीजे हैं। इसके साथ ही वे देश की पहली महिला म्यूजिक प्रोड¶ूसर भी रही। बचपन से ही डिजिटल टेक और संगीत में रुचि रखने वाली कैरी 1997 में इस फील्ड में आयीं। उन्होंनें 2005 में ऑडियो इंजीनियरिंग का कोर्स किया। देश के तमाम अच्छे क्लबों में परफार्म करने के साथ उन्होंने विदेशों में भी परफार्म किया। कैरी का देश की पहली डीजे होने के साथ-साथ 2002 से 2003 के दौरान दिल्ली की टॉप 5 डीजे में शुमार है।

-दलित महिला महापौर – श्रीमती अरुणा सौन्या

अरुणा सौन्या ग्वालियर नगर निगम की पहली महिला महापौर रहीं। उन्हें पहली दलित महिला महापौर होने का श्रेय भी हासिल है। अरुणा ने ग्वालियर नगर निगम में काम करने वाले 648 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का नियमितीकरण कराया। 45 वर्ष की उम्र में कैंसर से उनकी मौत हो गई।

-दलित महिला मुख्यमंत्री – मायावती

मायावती पहली दलित महिला हैं जो भारत के किसी राज्य की मुख्यमंत्री बनीं। बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती (मायावती नौना कुमारी) का जन्म 15 जनवरी, 1956 को नई दिल्ली में हुआ। उन्होंने दिल्ली के कालिंदी कॉलेज से विधि स्नातक की उपाधि प्राप्त की। मायावती ने राजनीति में आने से पहले दिल्ली में एक शिक्षिका के रूप में कार्य किया। मायावती अविवाहित हैं और अपने समर्थकों में घ्बहनजीङ के नाम से जानी जाती हैं।

-दादा साहेब फालके पुरस्कार विजेता – देविका रानी (30.3.1908 – 8.3.1994)

1958 में घ्पद्यश्रीङ से सम्मानित देविका रानी घ्दादा साहेब फालकेङ पुरस्कार (1970) प्राप्त पहली भारतीय महिला हैं। भारतीय सिनेमा की पहली महिला फिल्म अभिनेत्री देविका रानी का जन्म वाल्टेयर (विशाखापटनम) में हुआ था। विख्यात कवि श्री रवीन्द्रनाथ टैगोर उनके चचेरे परदादा थे। चेन्नई के पहले सर्जन जनरल कर्नल एम.एन.चौधरी उनके पिता और श्रीमती लीला चौधरी उनकी माता थीं। स्कूली शिक्षा भारत में ही समाप्त कर देविका रानी ने लंदन से नाट¶ शिक्षा ग्रहण की। वहाँ वे घ्रॉयल एकेडमी ऑफ ड्रामेटिक आर्टङ और घ्रॉयल एकेडमी ऑफ म्यूजिकङ नामक संस्थाओं से भी जुड़ीं। उन्होंने आर्किटेक्चर, टेक्सटाइल एवं डेकोर डिजाइन विधाओं का भी अध्ययन किया। देविका रानी और उनके पति हिमांशु रॉय ने मिल कर बांबे टाकीज स्टुडियो की स्थापना की, जो भारत के प्राथमिक फिल्म स्टूडिओ में से एक है।

-न्यायाधीश – सुजाता मनोहर

भारतीय राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की सदस्य पहली महिला न्यायाधीश सुजाता मनोहर का जन्म 28.8.1934 को कानूनी पृष्ठभूमि वाले परिवार में हुआ। उनके पिता गुजरात के उच्च न्यायालय के प्रथम मुख्य न्यायाधीश थे। सुजाता ने मुंबई के एÜल्फस्टन कॉलेज से स्नातक और उसके बाद लेडी माग्र्रेट हॉल, ऑक्सफोर्ड से तर्कशास्त्र, राजनीति-शास्त्र और अर्थशास्त्र की पढ़ाई की। 20 साल की प्रेक्टिस के बाद उन्हें 1978 में मुंबई उच्च न्यायालय का न्यायाधीश और 1994 में मुंबई उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। 16 साल तक मुंबई उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में काम करने के बाद उन्हें सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाया गया, जहाँ से 1999 को वे सेवानिवृत्त हुर्इं।

-नोबल पुरस्कार विजेता – मदर टेरेसा (26.8.1910 – 5.9.1997)

वर्ष 1979 में नोबल शांति पुरस्कार प्राप्त करने वाली पहली भारतीय महिला मदर टेरेसा हैं। मदर टेरेसा (अग्नेसे गोंकशे बोजशियु) का जन्म एक अल्बेनीयाई परिवार में उस्कुब, ओटोमन साम्राज्य (सोप्जे, मेसेडोनिया गणराज्य) में हुआ। मदर टेरेसा रोमन कैथोलिक नन थीं, जिनके पास भारतीय नागरिकता थी। उन्होंने 1950 में कोलकाता में मिशनरीज ऑफ चेरिटी की स्थापना की। 45 सालों तक उन्होंने गरीब, बीमार, अनाथ लोगों की मदद की और चेरिटी के मिशनरीज के प्रसार का भी मार्ग प्रशस्त किया। 1980 में उन्हें भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान घ्भारत रत्नङ प्रदान किया गया।

-पत्रकार – हेमंत कुमारी देवी

अंग्रेजी हुकूमत के फंदे से देश को आजाद कराने में जिस महिला ने अपनी कलम उठाई वे थीं हेमंत कुमारी देवी। उन्हें देश की पहली महिला पत्रकार होने का गौरव प्राप्त है। 1868 में जन्मीं और इलाहाबाद से प्रकाशित होने वाली महिलाओं की पत्रिका घ्सुगृहिणीङ की संपादक हेमंत कुमारी देवी बंगाली थीं। आगरा में रोमन कैथलिक कानवेंट और लाहौर व कलकत्ता में पढ़ीं हेमंत कुमारी को घ्चौधराइनङ के नाम से भी जाना जाता है।

-प्रधानमंत्री – इंदिरा गांधी (19.11.1917 – 31.10.1984)

भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री होने का गौरव इंदिरा प्रियदर्शिनी गांधी को प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति को नए आयाम दिए। विश्व राजनीति के क्षितिज पर भी वे एक युग बन कर छायी रहीं। राष्ट्रप्रेम, राष्ट्र की अखंडता, राजनीति और लोक कल्याण आदि उन्हें अपने दादा पंडित मोतिलाल नेहरू और पिता पंडित जवाहरलाल नेहरू से विरासत में मिले। एशिया की इस घ्लौह-महिलाङ का जन्म इलाहाबाद में हुआ। उन्होंने पश्चिम बंगाल में विश्वभारती विश्वविद्यालय और इंग्लैंड की ऑक्सफोर्ड युनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त की। फिरोज गांधी से उनका विवाह 1942 में हुआ। विश्व में भारत की उज्ज्वल छवि बनाने में उन्होंने भरसक योगदान दिया। स्वयं द्वारा दिए गए नारे घ्गरीबी हटाओङ को उन्होंने ईमानदारी से कार्यान्वित किया। बैंको का राष्ट्रीयकरण, गरीबों के उत्थान के लिए आयोजित 20 सूत्रीय कार्यक्रम, सोवियत संघ के साथ नजदीकी संबंध कायम करना आदि उनकी विशेष उपलब्धियां रहीं। इंदिरा गांधी घ्भारत रत्नङ से सम्मानित भारत की पहली महिला हैं।

-बस कंडक्टर – सुलोचना बनसोडे

नवी मुंबई महानगर पालिका परिवहन निगम की पहली महिला बस कंडक्टर बनने का गौरव सुलोचना बनसोडे को मिला है। महाराष्ट्र में सांगली की रहने वाली सुलोचना 2 बच्चों की माँ हैं। सांगली से बी.कॉम की अधूरी पढ़ाई छोड़ सुलोचना ने वहीं से बस कंडक्टर का लाइसेंस और बौच लिया, मगर नई मुंबई आने के बाद ही उन्हें बस कंडक्टरी नसीब हुई। इसी के साथ उन्होंने एन.एम.एम.टी. की पहली महिला बस कंडक्टर होने का नया इतिहास रचा।

-बौडमिंटन क्वीन – साइना नेहवाल

साइना नेहवाल ओलंपिक खेल में महिला एकल बौडमिंटन के क्वार्टर फाइनल तक पहुँचने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी व विश्व जूनियर बौडमिंटन चैंपियनशिप जीतने वाली पहली भारतीय हैं। 17 मार्च, 1990 को हिसार (हरियाणा) में जन्मीं सायना ने शुरूआती प्रशिक्षण हैदराबाद के लालबहादुर स्टेडियम में कोच नानी प्रसाद से प्राप्त किया। माता-पिता दोनों के बौडमिंटन खिलाड़ी होने के कारण सायना का बौडमिंटन की ओर रुझान शुरू से ही था।

-भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी – डॉ. किरण बेदी

डॉ. किरण बेदी भारतीय पुलिस सेवा में भर्ती (1972) होने वाली पहली वरिष्ठ महिला अधिकारी हैं। विभिन्न पदों पर रहते हुए अपनी कार्य-कुशलता का परिचय देने वाली किरण बेदी संयुक्त आयुक्त पुलिस प्रशिक्षण तथा दिल्ली पुलिस स्पेशल आयुक्त (खुफिया) के पद पर कार्य कर चुकी हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ के शांति स्थापना ऑपरेशन विभाग में नागरिक पुलिस सलाहकार के पद को सुशोभित करने वाली किरण बेदी को वर्ष 2002 के लिए भारत की सबसे प्रशंसित महिला चुना गया। उनके मानवीय एवं निडर दृष्टिकोण ने पुलिस कार्यप्रणाली एवं जेल सुधारों के लिए अनेक आधुनिक आयाम जुटाने में महत्वपूर्ण योगदान किया। डॉ. बेदी का जन्म 9 जून, 1949 को पंजाब के अमृतसर शहर में हुआ। उन्होंने कानून की डिग्री के साथ घ्ड्रग एब्यूज एण्ड डोमेस्टिक वॉयलेंसङ विषय पर डॉक्टरेट की उपाधि भी प्राप्त की। वे एशियाई टेनिस चेंपियन रही हैं। उन्हें घ्शौर्यङ पुरस्कार, घ्रमन मौगसेसेङ पुरस्कार के अलावा कई अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हुए। डॉ. बेदी ने दो स्वयं सेवी संस्थाओं की स्थापना भी की है-घ्नवज्योतिङ (1988) और घ्इंडिया विजन फाउंडेशनङ (1994। डॉ. बेदी ने कई पुस्तकें भी लिखी हैं।

-भारतीय राष्ट्रीय आयोग की सभापति -डॉ. एनी बेसेंट (1.10.1847 – 20.9.1933)

अग्रणी थियोसोफिस्ट, महिला अधिकारों की समर्थक, प्रतिभा सम्पन्न लेखिका, वक्ता, स्वतंत्र विचारक एवं अपना सारा जीवन देश के लिए अर्पण करने वाली डॉ. एनी बेसेंट भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्रथम महिला सभापति हैं। डॉ. बेसेंट का जन्म लंदन शहर में हुआ। इनके पिता अंग्रेज और माता आयरिश थीं। संकुचित विचारों वाले पति के विचारों में असमानता के कारण असाधारण व्यक्तित्व वाली एनी का दांपत्य जीवन सुखमय नहीं रहा। पति से संबंध विच्छेद के बाद कानून की सहायता से उनके पति दोनों बच्चों को प्राप्त करने में सफल हो गए। अपने दु:खों का निवारण करने के लिए उन्होंने अपना अधिकांश जीवन दीन-हीन अनाथों की सेवा करने, मजदूरों, अकाल-पीडि़तों व झुग्गी-झोपडि़यों में रहने वालों को सुविधा दिलाने में व्यतीत किया।

-महापौर – अरूणा आसफ अली (16.7.1909 – 29.7.1996)

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में अग्रणी भूमिका अदा करने वाली क्रांतिकारी जुझारू नेता श्रीमती अरूणा आसफ अली का जन्म बंगाली परिवार में हुआ। जाति से ब्राह्मण अरूणा का मूल नाम अरूणा गांगुली है। स्वतंत्र विचारों वाली अरूणा ने सुविख्यात वकील आसफ अली से 1928 में अंतर्जातीय प्रेम-विवाह किया। अरूणा ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सक्रियता से आंदोलन में तथा महात्मा गांधी और मौलाना अबुल कलाम आजाद के साथ कर्मठता से राजनीति में भाग लिया। 1958 में दिल्ली नगर निगम की प्रथम महापौर चुनी गर्इं। महापौर के बतौर उन्होंने दिल्ली के विकास, सफाई व स्वास्थ्य आदि के लिए अच्छा कार्य किया और नगर निगम की कार्य-प्रणाली में यथेष्ट सुधार किए। महान देशभक्त अरूणा घ्इंडो सोवियत कल्चरल सोसाइटीङ, घ्ऑल इंडिया पीस काउंसिलङ तथा घ्नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन वूमेनङ आदि संस्थाओं में विभिन्न पदों पर वर्षों आसीन रहीं और बड़ी लगन, निष्ठा, ईमानदारी और सक्रियता से कार्य किया। अरूणा को घ्लेनिन शांतिङ पुरस्कार और राष्ट्रीय एकता के लिए घ्इंदिरा गांधीङ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

-माउंट एवरेस्ट विजेता – बछेंद्री पाल

माउंट एवरेस्ट फतह करने का गौरव बछेंद्री पाल को प्राप्त है। बछेंद्री पाल का जन्म उत्तरांचल के चमोली जिले के बंपा गांव में 24 मई 1954 को हुआ। बछेंद्री के पिता उसकी पढ़ाई का खर्च नहीं उठा सकते थे इसलिए बछेंद्री को 8वीं से आगे की पढ़ाई का खर्च कढ़ाई-सिलाई कर जुटाना पड़ा। विषम परिस्थितियों के बावजूद बछेंद्री ने संस्कृत में एम.ए. और फिर बी.एङ की शिक्षा हासिल की। बछेंद्री को पहाड़ों पर चढ़ने का शौक बचपन से ही था। पढ़ाई पूरी कर वे एवरेस्ट अभियान दल में शामिल हो गर्इं। प्रशिक्षण के दौरान वे 7500 मीटर ऊँची मान चोटी पर सफलतापूर्वक चढ़ीं। 23 मई 1984 को उन्होंने एवरेस्ट की चोटी पर भारत का झंडा फहराया।

-मुख्यमंत्री – सुचिता कृपलानी (25.6.1908 – 1.12.1974)

25 जून 1908 को अंबाला (हरियाणा) में जन्मीं भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिज्ञ सुचिता ने लाहौर और दिल्ली में शिक्षा प्राप्त की। वे उन चंद महिलाओं में शामिल हैं जिन्होंने महात्मा गांधी के करीब रह कर देश की आजादी की नींव रखी। वे संविधान सभा की सदस्य और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की महासचिव भी थीं। सुचिता कृपलानी 1963 में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं। किसी भी भारतीय राज्य में यह पद संभालने वाली वे पहली महिला थीं। उनका कार्यकाल 2 अक्तूबर 1963 से 14 मार्च, 1967 तक रहा।

-राजदूत – विजय लक्ष्मी पंडित

पंडित जवाहरलाल नेहरू की बहन विजय लक्ष्मी पंडित भारत की पहली महिला राजदूत हैं। वे राज्यपाल जौसे महत्वपूर्ण पद पर भी रहीं। विजय लक्ष्मी का जन्म 15 अगस्त, 1900 में हुआ। उनकी शिक्षा-दीक्षा मुख्य रूप से घर में ही हुई। मंत्री स्तर का दर्जा पाने वाली भारत की वे प्रथम महिला थीं। संयुक्त राष्ट्र संघ की अध्यक्ष बनने वाली (वर्ष 1953) वे विश्व की पहली भारतीय महिला थीं।

-राजनयिक – सी. वी. मुथम्मा

देश की पहली महिला राजनयिक सी.वी. मुथम्मा हैं। मुथम्मा का जन्म कर्नाटक में कोडागु जिले के विराजपट में हुआ। वे कई देशों में भारतीय राजदूत रहीं। वे यूरोप, एशिया और अफ्रीका के कई देशों में राजनयिक स्तर पर भी रहीं। वे वर्ष 1949 में लोक सेवा में काम करने वाली पहली महिला थीं।

-राज्यपाल – सरोजिनी नायडू (13.2.1879 – 2.3.1949)

भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद बहुभाषाविद् सरोजिनी नायडू उत्तर प्रदेश की पहली राज्यपाल बनीं। इस तरह उन्हें भारत की पहली महिला राज्यपाल होने का गौरव प्राप्त है। सरोजिनी नायडू का जन्म भारत के हैदराबाद नगर में हुआ था। उनके पिता अघोरनाथ चट्टोपाध्याय एक वौज्ञानिक और शिक्षा शास्त्री थे। माँ वरदा सुंदरी कवयित्री थीं और बांग्ला में लिखती थीं। सरोजिनी अपने आठ बहन भाइयों में सबसे बड़ी थीं। कुशाग्र-बुद्धि के कारण उन्होंने 12 वर्ष की अल्पायु में ही 12 वीं परीक्षा अच्छे अंकों के साथ उत्तीर्ण की। इंग्लैंड से उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त सरोजिनी ने 13 वर्ष की आयु में घ्लेडी ऑफ दी लेकङ नामक कविता लिखी। नारी मुक्ति की समर्थक सरोजिनी को घ्केसर-ए-हिंदङ की उपाधि दी गई। वे घ्भारत कोकिलाङ नाम से भी प्रसिद्ध हुर्इं।

-राष्ट्रपति – प्रतिभा सिंह पाटील

भारत की तेरहवीं और प्रथम महिला राष्ट्रपति (वर्ष 2007) होने का गौरव श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटील (उपनाम-प्रतिभा ताई) को प्राप्त है। राजनीति में आने से पहले वे सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में कार्य कर रही थीं। महाराष्ट्र के जलगांव जिले में 19.12.1934 को जन्मीं प्रतिभा ताई ने जलगांव के मूलजी जेठा कॉलेज से स्नातकोत्तर व मुंबई के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई की। वे टेबल टेनिस की अच्छी खिलाड़ी रहीं। 1962 में वे मूलजी जेठा कॉलेज की घ्कॉलेज क्वीनङ चुनी गर्इं। श्रीमती पाटील पाँच बार महाराष्ट्र विधानसभा की सदस्य रहीं। वे महाराष्ट्र सरकार में उप मंत्री, राज्यमंत्री, केबिनेट मंत्री रहीं। वे महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस की प्रमुख व राजस्थान की राज्यपाल भी रहीं। ग्रामीण अर्थ-व्यवस्था के विकास और भारतीय महिलाओं के कल्याण के लिए उन्होंने कार्य किए और महिलाओं के उत्थान के लिए विश्व महिला सम्मेलनों में भी भाग लिया।

-लोकल ट्रेन चालक – प्रीति कुमारी

मुंबई की लाइफ लाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन (मुंबई के पश्चिम रेलवे)े की पहली महिला लोकल ट्रेन चालक प्रीति कुमारी हैं। बिहार के बांका जिले के एक छोटे से गांव दरभंगा में रहने वाली प्रीति अपने गांव की पहली महिला हैं जो काम-काज के लिए बाहर निकली। प्रीति ने इलेक्ट्रॉनिक्स एण्ड इंस्टçमेंटेशन में डिप्लोमा के अलावा बी.ए. की डिग्री प्राप्त की। उसके बाद ड्राइवर के पद के लिए होने वाले मेडिकल टेस्ट पास कर मुंबई के महालक्ष्मी स्टेशन पर 6 महीने तक प्रशिक्षण लिया। प्रीति भारतीय रेलवे में इस पद पर सीधी नियुक्ति पाने वाली भी पहली महिला हैं।

-लोकसभा अध्यक्ष – मीरा कुमार

भारतीय संसद के निचले सदन लोकसभा के अध्यक्ष पद पर (वर्ष 2009 में) आसीन होने वाली मीरा कुमार प्रथम भारतीय महिला लोकसभा अध्यक्ष हैं। उन्हें लोकसभा अध्यक्ष पद पर आसीन पहली दलित महिला का गौरव भी प्राप्त है। पूर्व उप प्रधानमंत्री श्री जगजीवन राम की बेटी मीरा कुमार का जन्म वर्ष 1945 में पटना में हुआ। दिल्ली के इंद्रप्रस्थ कॉलेज व मिरांडा हाउस से शिक्षा ग्रहण करने वाली मीरा कुमार कानून में स्नातक और अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर हैं। मीरा कुमार 1973 में भारतीय विदेश सेवा के लिए चुनी गर्इं। इसके बाद स्पेन, ब्रिटेन और मॉरीशस में उच्चायुक्त रहीं। वे कांग्रेस महासचिव और कांग्रेस कार्य समिति की सदस्य भी रहीं।

वकील – कार्नेलिया सोराबजी (15.11.1866 – 1954)

भारत की पहली महिला वकील कार्नेलिया सोराबजी के समय समाज में महिलाएं मुखर नहीं थीं और न ही महिलाओं को वकालत का अधिकार था। परंतु अपनी प्रतिभा के बल पर उन्होंने महिलाओं को कानूनी परामर्श देना आरंभ किया और महिलाओं के लिए वकालत का पेशा खोलने की मांग उठायी। अंतत: 1907 के बाद कार्नेलिया को बंगाल, बिहार, उड़ीसा और असम की अदालतों में सहायक महिला वकील का पद दिया गया और एक लंबी जद्दोजहद के बाद 1924 में महिलाओं को वकालत से रोकने वाले कानून को शिथिल कर महिलाओं के लिए भी वकालत जौसा जटिल और प्रतिष्ठित पेशा खोल दिया गया।

– वित्त सचिव – सुषमा नाथ

भारत की पहली महिला वित्त सचिव हैं 1974 बौच की मध्य प्रदेश कैडर की भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी सुषमा नाथ। वित्त सचिव का पद संभालने से पहले वे वित्त मंत्रालय में ही व्यय सचिव के पद पर कार्यरत थीं। वित्त मंत्रालय में सबसे वरिष्ठ अधिकारी होने के नाते और बजट तथा अन्य आर्थिक मामलों का गहन ज्ञान और उनके व्यापक अनुभव को देखते हुए ही सुषमा नाथ को वित्त सचिव का पद सौंपा गया।

प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई, स्वतंत्रता की साधक सुभ्रद्रा कुमारी चौहान, हिंदू समाज के संरक्षक छत्रपति शिवाजी महाराज की माँ जीजाबाई, कार चलाने वाली (1905) पहली भारतीय महिला सुजान आर. डी. टाटा, प्रथम भारतीय महिला व्यावसायिक पायलट (1951) डेक्कन एयरवेज की प्रेम माथुर, किसी उच्च न्यायालय की पहली भारतीय महिला जज (1959) अन्ना चांडी, एशियन खेल (1970) में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला कमलजीत संधू, भारतीय थल सेना (1992) में भर्ती होने वाली पहली महिला कैडेट प्रिया झिंगन, भारतीय वायुसेना में अकेले जहाज उड़ाने वाली पहली भारतीय महिला पायलट (1994) हरिता कौर देओल जौसी अनेकानेक महिलाएं हैं, जिन्होंने अपने लिए नई राह तलाशी और अपना व देश का नाम रोशन किया। इन महिलाओं के अलावा हर क्षेत्र में महिलाओं का मार्गदर्शन करने वाली एशियाई खेल में दौड़ में नए कीर्तिमान स्थापित करने वाली भारतीय घ्ट्रेक एण्ड फील्डङ की रानी पी.टी. उषा, भारत की राजधानी दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित, भारत की सबसे लोकप्रिय गायिका घ्भारत रत्नङ लता मंगेशकर, गीत के हर क्षेत्र में अपनी आवाज का जादू बिखेरने वाली आशा भोसले, जन-आंदोलन को एक नई परिभाषा देने वाली नर्मदा की नायिका मेधा पाटकर, अंतर्राष्ट्रीय फैशन डिजाइनर रितु बेरी जौसी अनेकानेक गौरवशाली महिलाओं के अमूल्य सहयोग को भी कैसे भुलाया जा सकता है।

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