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सुरत में मानवता धर्म निभा रहे, भदोही के गुलजारी उपाध्याय…

उ.प्र. (सं. भा.) समाजसेवी का चोला पहनकर घुमनें वाले आपकी नजर में यदि हजारों होगें तो, इसी में सैकड़ो ऐसे भी हैं जो भीड़-भाड़ में विलुप्त हैं। ऐसे लोग कमतर हैं जो समयानुसार समाज के प्रति घर-परिवार से निकलकर सेवाभावी पथ समर्पित रहते हैं। खैर..ऐसे विलुप्त लोगों की तलाश आपकी नजरें भी तभी कर पाती हैं, जब कोई आपात की स्थिति पैदा होती है। आज जब देश में कोरोना जैसी महामारी ने तांडवरूप ले लिया है, तब ‘लॉकडाउन’ चल रहा है। हर गांव, हर कस्बा, हर बाजार, हर शहर, बड़े-बड़े महानगर विरान होकर बन्द हैं। देश की आर्थिक राजधानी मुंम्बई पूरी तरह से ठप्प पड़ी है, क्या मील, क्या कारखाने, सब बन्द पड़े हैं। सबसे बड़ी विकट परिस्थिति में महानगरों में अन्यत्र से आये हुए उन मजदूरों और मध्यम वर्गीय हैं, जो दूसरे राज्यो में रहकर अपनी जीविका चलाते हैं। हमारे उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और उड़ीसा से काफी संख्या में लोग गुजरात के सूरत शहर में रहते है, देश में एकाएक ‘लॉकडाउन’ लागू होने की वजह से लोग यहाँ फसे हुए हैं। यहाँ के समाजसेवी वर्ग अपने-अपने स्तर से लोगों तक सेवाभावी भोजन पहुँचा रहे हैं, जो कि मानवता पथ बहुत ही सराहनीय कार्य है।

‘उत्तर भारतीय समाज’ में अग्रणीय समाजसेवी, बीजेपी के स्थानीय कद्दावर नेता गुलजारी उपाध्याय ने ‘सशक्त परदेशी’ बतौर सुरत को मानवता से गुलज़ार कर दिया है। मूलरूप से भदोही जनपद के सुरियावां ब्लॉक के अंतर्गत अबरना गांव निवासी गुलजारी उपाध्याय यहां उद्योग पति भी हैं, जिन्होनें धार्मिक संस्था “श्री छठ मानव सेवा ट्रस्ट” के माध्यम से सोशल दूरी को बनाये रखते हुए सूरत के डिंडोली विस्तार में 1000 लोगों को प्रतिदिन भोजन कराने का मुहिम शुरू किया है। इनकी संस्थागत टीम का सेवा कार्य ‘लॉकडाउन’ जब तक है, तब तक अनवरत रूप से चलता रहेगा। इस सेवाभावी कार्य में संस्था के  प्रमुख राजेंद्र उपाध्याय एवं गुलज़ारी उपाध्याय, इंद्रमोहन झा, ओंकार मिश्रा, राजेश पांडेय, विजय पांडेय, सी.एल शर्मा, रामजी सिंह, श्यामदेव शर्मा सहित सैकड़ो परदेशी विशेष सहयोगी भूमिका में हैं।

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