मुंबई (सं. भा.)। आज भी ग्रामिणी क्षेत्रों में कई ऐसे इलाके है जहां अनेक कारणों से बच्चे स्कूल नही पहुच पाते है जिससे उसके जीवन मे शिक्षा का उजाला नही पहुंच पाता है। हालांकि यह सिलसिला कई दसको से चल रहा है लेकिन कोरोना काल के चलते पिछले डेढ़ साल मे इसमे काफी इजाफा हुआ है। एक राज्य स्तरीय संर्वेक्षण और इससे प्राप्त आंकड़ों से पता चला है कि लॉकडाउन के कारण महाराष्ट्र में २५,००० से अधिक छात्र या तो कभी स्कूल नहीं गए हैं या कक्षाओं में भाग नहीं ले पाने के कारण स्कूल से बाहर हो गए हैं। ताज्जुब की बात यह है कि इसमें मुंबई शहर और उपनगरों के १०, ८२० यानि कि ४३ प्रतिशत छात्र शामिल हैं। यह सर्वेक्षण कोविड १९ और इसके संक्रमण को रोकने के लिए लगे लॉकडाउन के कारण पिछले कुछ महीनों में बच्चों द्वारा स्कूल छोड़ देने की जानकारी सामने आने के आलोक मे किया गया था।
राज्य शिक्षा विभाग ने राज्य भर के स्कूली छात्रों की पहचान करने के लिए १ से १० मार्च के बीच एक अभियान शुरु किया था। शिक्षा विभाग के अधिकारियों और राज्य के स्कूलों के कर्मचारियों के सदस्यों और शिक्षकों ने अपने इलाकों में छात्रों का एक सर्वेक्षण किया ताकि इस डेटा को एकत्र किया जा सके। इस अभियान में ३६ जिलों में से ३३ जिलों के आंकड़ों को समाहित किया गया। संक्रमभ बढ़ने के कारण अमरावती, औरंगाबाद और बुलढाणा जैसे जिलों का सर्वेक्षण नहीं किया जा सका।
सर्वे से प्राप्त आकड़ों के अनुसार, केवल २८८ छात्र बाल श्रम में लिप्त पाए गए, जबकि १२१२ छात्र कक्षा में उपस्थित नहीं हो सके। क्योंकि वे दिव्यांग बच्चे थे। शिक्षा विभाग अब इन सभी छात्रों को स्कूलों में फिर से नामांकित करने के लिए दिशानिर्देशों के साथ आने की योजना बना रहा है।
सर्वेक्षण के अनुसार उस बच्चे को स्कूल से बाहर या ड्रॉपआउट छात्र माना जाता है जो छात्र को कभी स्कूल नहीं गए है और जिन्होंने नियमित रुप क्लास की गतिविधियों में भाग नहीं लिया है।
अधिकांश छात्र मुंबई शहर व उपनगरों से
शिक्षा विभाग द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, १४००० से अधिक छात्र राज्य से दूसरे राज्यों में चले गए हैं। जिनमें से अधिकांश ८८१० छात्र मुंबई शहर और उपनगरों से हैं। इनमें से अधिकतर छात्र बीएमसी में पढ़ने वाले वे बच्चे है जिनके माता पिता उत्तर प्रदेश, बिहार या मध्य प्रदेश से मुंबई आए थे और लॉकडाउन के डर से वापस सपरिवार अपने गांव चले गए एक अधिकारी के अनुसार, कुल मिलाकर १०००० से अधिक छात्र मुंबई से दूसरे जिलों या राज्यों में चले गए हैं। हालांकि इस सर्वे की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। और कहा जा रहा हैं कि बच्चों के स्कूल छोड़ने की संख्या कहीं अधिक है। बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था के वरिष्ठ कार्यकर्ता ने बताया कि ऐसे बच्चों की वास्तवकि संख्या बहुत ही ज्यादा है जिनपर लॉकडाउन की मार पड़ी है और उन्हें शिक्षा से वंचित होना पड़ा है। उन्होंने कहा कि यह सर्वे ऐसे समय में किया गया है जब लोग एक जगह से दूसरे जगह आ और जा नहीं सकते तो यह कैसे मान लिया जाए कि इसकी टीम सभी बच्चों तक पहुंची होगी।


