.राकेश चौबे
नायगांव (सं. भा.) : वर्षों से नायगांव पूर्व के रिक्शा स्टैंड से रेलवे स्थानक तक एक पुल की मांग कर रहे स्थानीय नागरिकों की उम्मीदों को विधायक स्नेहा दुबे पंडित ने एक बार फिर झटका दिया है। हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा सत्र में नायगांव की इस ज्वलंत समस्या पर कोई चर्चा न होना जनता के लिए निराशाजनक रहा।
करीब एक किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए नागरिकों को नमक की खाड़ी पर बने जर्जर लोहे की सीढ़ियों वाले पुल से होकर गुजरना पड़ता है। यह पुल बुजुर्गों, विकलांगों और गर्भवती महिलाओं के लिए खतरे से खाली नहीं है। कई बार इस पुल से फिसलकर लोग घायल भी हुए हैं। स्थानीय लोगों ने कई बार प्रशासन के खिलाफ आंदोलन किया, पर कोई सुनवाई नहीं हुई।

विधानसभा चुनाव में जनता ने बड़ी उम्मीदों के साथ स्नेहा दुबे पंडित को जिताकर भेजा, लेकिन अब उन्हें जनता की समस्याओं की कोई परवाह नहीं है—ऐसा नागरिकों का कहना है। नायगांव के लोगों का आरोप है कि विधायक केवल वसई की समस्याओं पर ध्यान दे रही हैं, जबकि नायगांव की ओर उनका कोई झुकाव नहीं दिख रहा।
हाल ही में पुल निर्माण की मांग को लेकर लगभग दस हजार लोगों ने हस्ताक्षर कर ज्ञापन दिया था, बावजूद इसके विधायक ने अब तक मौके का निरीक्षण तक करना उचित नहीं समझा। स्थानीय लोगों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि कहीं विधायक को कुर्सी का घमंड तो नहीं हो गया।
नायगांववासियों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है और उनकी मांग है कि इस गंभीर मुद्दे को तुरंत गंभीरता से लिया जाए।


