बहुत ही फेमस फिल्मी डायलॉग है – सिंदूर की कीमत तुम क्या जानो रमेश बाबू…। गाहे बगाहे किसी न किसी के मुंह से यह डायलॉग सुनाई दे ही जाता है। तब शायद किसी को यह एहसास नहीं रहा होगा कि इसी डायलॉग के सिंदूर की कीमत केंद्र की मोदी सरकार ने बखूबी समझा और उसे अंजाम तक पहुंचाया है। पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकवादियों के हमले में बेगुनाह नागरिकों की हत्या ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। प्रत्येक भारतीय नागरिक चाहता था कि भारत सरकार पाकिस्तानी आतंकियों के इस कृत्य का बदला ले, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने कर दिखाया। पहलगाम के नरसंहार के बाद ही पाकिस्तान के खिलाफ जंग का वातावरण बना। 21 अप्रैल तक जंग की कोई चर्चा भी नहीं थी। ऑपरेशन सिंदूर के लिए प्रत्येक भारतवासी को अपनी भारतीय सेना पर बेहद गर्व है। ऑपरेशन सिंदूर को सीमा पार से हो रही उकसावे की कार्रवाई का निर्णायक जवाब माना जा रहा है, जिसने देशभर में एकजुटता की नई भावना को जन्म दिया है। आतंकवाद के हर रूप के खिलाफ देश पूरी तरह एकजुट है। साथ ही, हमारी इच्छाशक्ति दृढ़ और मकसद अडिग है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साहसी और निर्णायक नेतृत्व में भारतीय सशस्त्र बलों ने हर सीमा पार उकसावे का सटीक और ताकतवर जवाब दिया है। प्रधानमंत्री मोदी का नेतृत्व यह संदेश देता है कि भारत आतंक के सामने कभी चुप नहीं रहेगा। हमारी सरजमीं, हमारे नागरिकों या देश की रक्षा करने वाले हमारे बहादुर जवानों पर किसी भी हमले को भारत कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। बीते कुछ दिनों की घटनाएं यह साफ कर चुकी हैं कि हमारी शांति को चुनौती देने वाली हर कोशिश का जवाब ठोस और निर्णायक कार्रवाई से दिया जाएगा। देश की एकता और अखंडता की रक्षा के लिए उठाए गए हर कदम में संपूर्ण देश पूरा सहयोग देने को तैयार है। करोड़ों भारतीयों का मानना है कि भारत शांति चाहता है, लेकिन अपनी गरिमा, सुरक्षा और संप्रभुता की कीमत पर नहीं। इससे पहले 2019 में भी पाकिस्तान के खिलाफ पुलवामा आतंकी हमले के बाद युद्ध की स्थिति बन गई थी और डोकलाम संघर्ष के बाद चीन से भी हालात काफी तनावपूर्ण बन गए थे। यानि पिछले कुछ सालों में कम से कम तीन बार जंग की स्थिति में फंसने की नौबत आ चुकी है। जो बताता है कि भारत ने मजबूरी में सही, लेकिन अपने डिफेंस को और मजबूत किया है और अटैक को और धारदार बनाया है। आतंकवाद के खिलाफ भारत के ऑपरेशन सिंदूर में रूसी एयर डिफेंस सिस्टम एस-400 पाकिस्तानी खतरों के खिलाफ ढाल बनकर खड़ा रहा है। एस 400 ट्रायम्फ, बराक 8 MRSAM (मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल) और स्वदेशी आकाश ने पाकिस्तानी मिसाइलों को भारत की जमीन पर गिरने नहीं दिया। जिसके बाद से एस-400 डिफेंस सिस्टम की चर्चा पूरे भारत में हो रही है। भारत का बच्चा – बच्चा इस डिफेंस सिस्टम के नाम और इसकी ताकत को जान चुका है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रूस, एस-400 डिफेंस सिस्टम का बाप एस-500 एयर डिफेंस सिस्टम भी बना चुका है, जिसकी क्षमता जानकर आप दंग रह जाएंगे। पाकिस्तान के खिलाफ इन डिफेंस सिस्टम ने काफी शानदार काम किया है लेकिन कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि चीन के खिलाफ ये डिफेंस सिस्टम उतने प्रभावी नहीं हो पाएंगे। एस-500 मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम को सिर्फ एक डिफेंस सिस्टम कहना इसकी क्षमता के साथ बहुत बड़ा अन्याय होगा। दरअसल ये एक मल्टीलेयर्ड, मल्टी टारगेट और स्पेस-डिफेंस कैपेबल डिफेंस सिस्टम है। जिसका मतलब ये हुआ कि एस-500 दुश्मनों के फाइटर जेट्स, क्रूज मिसाइल्स, हाइपरसोनिक मिसाइल या कोई अन्य हथियार और यहां तक कि पृथ्वी के लोअर-ऑर्बिट में मौजूद दुश्मनों के सैटेलाइट्स को भी मार सकता है। यानि अगर दुश्मन का सैटेलाइट किसी क्रिटिकल स्थल की जासूसी कर रहा हो, तो इससे उसे मार गिराया जा सकता है। धरती से ऊपर इसकी रेंज 2000 किलोमीटर है। इसके अलावा, एस-500 दुनिया का इकलौता डिफेंस सिस्टम है, जिसका रेंज 600 किलोमीटर है और ये एक साथ 10 से ज्यादा लक्ष्यों को एक बार में इंटरसेप्ट कर सकता है और वो भी मैक-20 की रफ्तार से। हालांकि इतनी सारी क्षमताओं के रहने के बावजूद इसका प्राइमरी फोकस बैलिस्टिक और हाइपरसोनिक मिसाइलों को रखा गया है, क्योंकि दुनिया में अभी सिर्फ इन्हीं तरह की मिसाइलें मौजूद हैं। रूस ने साल 2018 में एस-500 एयर डिफेंस सिस्टम का टेस्ट किया था। टेस्ट के समय एस-500 के साथ सबसे लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल का परीक्षण किया गया था, जो कामयाब रहा था। एस-500 के पास 77N6-N और 77N6-N1 इंटरसेप्टर मिसाइलें हैं, जिससे ये परमाणु वारहेड को लेकर आने वाली इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों को भी रास्ते में ही नष्ट कर सकती है और परमाणु बम फटने का खतरा खत्म हो सकता है। हकीकत ये है कि इस सिस्टम की क्षमता के बराबर फिलहाल अमेरिका के पास भी कोई डिफेंस सिस्टम नहीं है। पाकिस्तान के साथ मौजूदा संघर्ष ने एयर डिफेंस सिस्टम की जरूरत को दिखा दिया है। भारत ने जब रूस से एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा था, उस वक्त अमेरिका ने सख्त एतराज जताया था और CAATSA के तहत रूसी हथियार खरीदने पर भारत के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की धमकी दी थी। संयोग से उस वक्त भी डोनाल्ड ट्रंप ही राष्ट्रपति थे। हालांकि अमेरिका ने कोई एक्शन नहीं लिया था।


