spot_img
Homeसंपादकीयहोर्मुज की महत्ता

होर्मुज की महत्ता

होर्मुज का महत्व कुछ समय पहले तक देश दुनिया के लोग शायद ही जानते हों। मगर जब दुनिया भर में गैस और पेट्रोलियम पदार्थों की किल्लत शुरू हुई तो पूरी दुनिया को इसका अहसास हुआ। अब तो दुनिया का बच्चा – बच्चा होर्मुज जलडमरूमध्य को जान गया है। अमेरिका – इजरायल – ईरान के युद्ध ने पूरी दुनिया को होर्मुज जलडमरूमध्य की महत्ता और उसके बिना जिंदगी की परेशानी को बहुत अच्छी तरह से समझा दिया है। चलिए आज आपको होर्मुज जलडमरूमध्य के बारे में बताते हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच एक संकरा, लेकिन रणनीतिक रूप से दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान व यूएई के बीच स्थित यह जलमार्ग, दुनिया के लगभग 20% तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति के लिए एकमात्र रास्ता है, जो इसे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है। इस क्षेत्र पर ईरान का प्रभाव है, और यह अक्सर अमेरिका-ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव का केंद्र रहता है। सऊदी अरब, ईरान, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे प्रमुख निर्यातक इस मार्ग पर निर्भर हैं तथा 80% से अधिक तेल एशियाई बाज़ारों, विशेष रूप से भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया की ओर जाता है। होर्मूज का मतलब केवल एक नाम नहीं, बल्कि शक्ति और नियंत्रण भी है। सामरिक दृष्टि से, जो देश इस रास्ते पर नियंत्रण रखता है, वह वैश्विक अर्थव्यवस्था की चाबी अपने पास रखता है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के दौरान अक्सर इस रास्ते को बंद करने की धमकियाँ दी जाती हैं। भारत का लगभग 40%  कच्चा तेल आयात और लगभग 54% एलएनजी आयात इस रणनीतिक मार्ग से होकर गुजरता है। इसकी संकीर्ण चौड़ाई के कारण इसमें आवाजाही के लिये व्यवधान करना बहुत आसान है। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात इस जलडमरूमध्य को बाईपास करने वाली पाइपलाइनों का संचालन करते हैं, जबकि ईरान ओमान की खाड़ी में सीधे तेल भेजने के लिये गोरेह-जस्क पाइपलाइन और जस्क टर्मिनल पर निर्भर है। होर्मुज़ नाम को लेकर इतिहासकार और भाषाविद एकमत नहीं हैं। होर्मुज़ केवल जलडमरूमध्य का नाम नहीं है, यह एक पुराना शहर और सामुद्रिक साम्राज्य भी था। आरम्भ में होर्मुज़ का मूल बसावट क्षेत्र ईरान के तट के पास माना जाता है। बाद में समुद्री व्यापार बढ़ने पर शासकों ने अपना केंद्र एक द्वीप पर स्थानांतरित कर दिया। इस द्वीप को भी होर्मुज़ द्वीप कहा जाने लगा। यही द्वीप फारस की खाड़ी के मुहाने पर था। इस कारण से आसपास के समुद्री रास्ते को भी होर्मुज़ के नाम से जोड़ा जाने लगा। 10वीं से 17वीं शताब्दी के बीच होर्मुज़ साम्राज्य ने महासागरीय व्यापार पर गहरी पकड़ बना ली थी। अरब, फारस, भारत, पूर्वी अफ्रीका और दक्षिणपूर्व एशिया के बीच जाने वाले जहाज़ यहां रुकते थे। मसाले, मोती, घोड़े, कीमती पत्थर, कपड़ा और धातुओं का बड़ा व्यापार यहीं से होता था। बोलचाल और आधिकारिक अभिलेखों में यह इलाका होर्मुज़ के नाम से इतना प्रसिद्ध हुआ कि जलडमरूमध्य का नाम भी वहीं से स्थायी हो गया। इस तरह पहले शहर और द्वीप का नाम था होर्मुज़ फिर उसी से समुद्री रास्ते का नाम बना होर्मुज़ जलडमरूमध्य यानी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़। फारसी और अवेस्ता परम्परा में ईश्वर के लिए एक प्रमुख नाम है अहुर मज्दा। कुछ विद्वान मानते हैं कि समय के साथ अहुर मज़्दा से ओरमज़्द या ओहरमज़्द जैसे रूप बने। स्थानीय उच्चारणों में यह ओरमुज़, होरमुज़ और आगे चलकर होर्मुज़ बन गया। यह बदलाव भाषा-विज्ञान की सामान्य प्रक्रिया जैसा है, जैसे लंबे नाम छोटे रूप लेते हैं। ध्वनियां बदलती हैं, पर मूल से उनका संबंध बना रहता है। नाम के रूप में होर्मुज़ कई रूपों में लिखा और बोला गया। केवल धार्मिक या भाषाई कारण ही नहीं, आर्थिक ताकत ने भी इस नाम को विश्व-स्तर पर मशहूर किया। जब होर्मुज़ साम्राज्य चरम पर था, तो इसे ‘की ऑफ पर्शियन गल्फ’ यानी फारस की खाड़ी की चाबी कहा जाता था। जो जहाज़ इस क्षेत्र से गुजरते, वे होर्मुज़ में कर चुकाते। आसपास के जलक्षेत्र और रास्तों को भी लोग उसी शहर के नाम से बुलाने लगे। यह आम मानवीय आदत है। जैसे, किसी बड़े स्टेशन या शहर के नाम से पूरी पट्टी पहचानी जाने लगती है। इस तरह शहर की समृद्धि और सामुद्रिक सत्ता ने यह सुनिश्चित कर दिया कि होर्मुज़ नाम भूगोल के इस हिस्से पर हमेशा के लिए अंकित हो जाए। अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी का ऐलान कर दिया है। सोमवार यानी 13 अप्रैल को भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे से ईरानी बंदरगाहों पर जहाजों की आवाजाही पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाएगी। यह अरब खाड़ी और ओमान की खाड़ी में ईरानी बंदरगाहों पर लागू होगी। यह नाकेबंदी सभी देशों के जहाजों पर बिना किसी भेदभाव के लागू होगी। यानी किसी देश के जहाज को कोई छूट नहीं मिलेगी। एक्सपर्ट का कहना है कि इसका असर भारत और चीन पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।

RELATED ARTICLES

Most Popular

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com