प्रयागराज महाकुंभ 2025 में उमड़े आस्था के सागर से हर कोई अचंभित और अभिभूत हो गया है। सिर्फ 45 दिनों के अंदर 66 करोड़ से अधिक लोगों का त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाना सनातन संस्कृति के प्रति श्रद्धालुओं के समर्पण को दर्शाता है। इन 45 दिनों के दौरान प्रयागराज में बरसे अमृत को कोई नहीं भूल पाएगा। अनगिनत यादों के साथ प्रयागराज में आयोजित दिव्य और भव्य महाकुंभ विदा हो चुका है, लेकिन अब संगम तट के खाली घाट और महाकुंभ के विशाल क्षेत्र की ताजा तस्वीरें हर किसी को भावुक कर दे रही हैं। दरअसल, प्रयागराज महाकुंभ के समापन के बाद महाकुंभ के दौरान जो घाट भक्तों से भरे रहते थे, वे अब सूने हो चुके हैं। जिस महाकुंभ क्षेत्र में सिर्फ श्रद्धालु ही श्रद्धालु नजर आते थे, वहां अब उंगलियों पर गिने जा सकते लोग ही बचे हैं। एक तरह से घाट पर पूरी तरह सन्नाटा है। इतना ही नहीं प्रयागराज जाने वाली जिन सड़कों पर 10-10, 20-20 किलोमीटर की दूरी तक जाम लगता था और लोगों को उस जाम में घंटों-घंटों तक जूझना पड़ता था, उन सड़कों पर अब गाड़ियां फर्राटा भर सकती हैं, क्योंकि आस्था के जिस सबसे बड़े समागम महाकुंभ 2025 का हिस्सा बनने के लिए इन 45 दिनों के दौरान रोजाना लाखों-करोड़ों की तादाद में देश-विदेश से श्रद्धालु आ रहे थे, वो श्रद्धालु अब अपने-अपने गंतव्य की ओर लौट चुके हैं। प्रयागराज महाकुंभ 45 दिनों तक आस्था, श्रद्धा और संस्कृति का केंद्र बना रहा है। करोड़ों श्रद्धालुओं ने यहां पुण्य स्नान किया, संतों-महात्माओं के प्रवचन सुने और दिव्य वातावरण का आनंद लिया है। अब जब महाकुंभ का समापन हो गया है, तो यह एक याद बनकर दिलों में बस गया है। महाकुंभ में बिताए पल, संतों की वाणी और आध्यात्मिक अनुभूतियां श्रद्धालुओं के हृदय में सजीव बनी रहेंगी। सनातन आस्था के महापर्व, महाकुंभ में दुनिया के कोने-कोने से श्रद्धालु पवित्र संगम में आस्था का स्नान करने प्रयागराज आए। सनातन आस्था का जुड़ाव इतना गहरा है कि महाकुंभ में पवित्र संगम में स्नान करने पाकिस्तान के सनातन मतावलंबी भी प्रयागराज पहुंचे। पाकिस्तान के सिंध प्रांत से 68 हिंदू श्रद्धालुओं का जत्था प्रयागराज पहुंचा। सभी श्रद्धालुओं ने पवित्र संगम में स्नान कर अपने पूर्वजों की अस्थियों का संगम में विसर्जन किया। पाकिस्तान के श्रद्धालु अपने पूर्वजों की अस्थियों का विसर्जन करने विशेष वीजा लेकर प्रयागराज आये। श्रद्धालुओं के साथ आये महंत रामनाथ ने बताया कि पहले वो सभी हरिद्वार गये। वहां अपने लगभग 480 पूर्वजों की अस्थियों का विसर्जन और पूजन किया। इसके बाद प्रयागराज आकर महाकुंभ में संगम स्नान किया और अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति की प्रार्थना की। महाकुंभ की व्यवस्था और सनातन आस्था के दिव्य भव्य आयोजन को देखकर सभी पाकिस्तानी श्रद्धालु अभिभूत थे। महाकुंभ न केवल सनातन आस्था बल्कि धर्म और आध्यात्म का विश्व में सबसे बड़ा आयोजन है। महाकुंभ में पाकिस्तान से आये श्रद्धालुओं का कहना था कि सनातन आस्था की डोर और महाकुंभ की पुकार उन्हें यहां खींच लाई। न केवल ये उनकी कई वर्षों से चाहत थी बल्कि उनके पूर्वजों की भी आस थी कि वो महाकुंभ में सम्मिलित हो पवित्र त्रिवेणी में स्नान कर सकें और यहां का जल अपने साथ ले जा सकें। भारत सरकार और यूपी की योगी सरकार का उन्होंने बहुत-बहुत धन्यवाद किया कि उनकी वजह से उन लोंगो को सनातन आस्था के ऐसे दिव्य-भव्य आयोजन में शामिल होने का सौभाग्य मिला। श्रद्धालुओं ने कहा कि महाकुंभ की व्यवस्था बहुत ही अच्छी हैं, यहां का वातवरण, यहां का भोजन, साफ-सफाई की व्यवस्था सभी तारीफ के काबिल है। पाकिस्तान में तो हमें मंदिर जाने भी नहीं मिलता था, यहां आकर न केवल हम धन्य हुए हैं बल्कि हमारे माता-पिता और पूर्वजों को भी मोक्ष मिल गया है। उन्होंने कहा कि बचपन से उन्होंने प्रयागराज की पावन भूमि और संगम के बारे में सुना था, मां गंगा में स्नान कर उनका जीवन सफल हो गया है।


