मुंबई (संवाददाता)। बांड सेवा नहीं करने वाले डॉक़टरों पर नजर रखने के लिए स्वास्थ्य शिक्षा विभाग ने सॉफ्टवेयर तैयार करने का निर्णय लिया है। यह सॉफ्टवेयर सरकारी अस्पताल से शिक्षा हासिल करने वाले जिन डॉक्टरों ने बांड सेवा पूरी की नहीं की इसका डाटा रखेगा।
सरकारी अस्पतालों से डॉक्टरी की डिग्री हासिल करने वाले प्रत्येक डॉक्टर को ग्रामीण भागों में बांड सेवा देना बंधक कारक होता है। किंतु नियम होने के बावजूद सरकारी मेडिकल कॉलेज से डिग्री हासिल करने वाले ४ हजार ५४८ छात्रों ने ग्रामीण इलाकों में सेवा नहीं दी है। यह सॉफ्टवेयर कौन सा डॉक्टर कौन से साल पास हुआ था, डॉक्टर ने बांड सेवा दी या नही, सेवा नहीं देने का कारण, वर्ष २०१९ तक कितने डॉक्टर सेवा देने के लिए उत्सुक है, इसकी जानकारी उपलब्ध करवाएगा।
गौरतलब है कि सरकारी अस्पतालों में छात्रों को मुक्त में चिकित्सा उपलब्ध करवाई जाती है, जिसके एवज में डॉक्टरों को ग्रामीण इलाकों में सेवा देना अनिवार्य है, ग्रामीण इलाकों में सेवा देने से मना करने में मुंबई के डॉक्टर अव्वल हैं, मुंबई से मेडिकल की डिग्री हासिल करने वाले २ हजार ३६७ छात्रों ने ग्रामीण इलाकों में काम करने से मना कर दिया है। नियम उल्लंघन करने वाले छात्रों में मुंबई के ग्रांट मेडिकल कॉलेज, लोकमान्य तिलक कॉलेज, सेठ.जी.एस कॉलेज और टोपीवाला नेशनल मेडिकल कॉलेज और कलवा के राजीव गांधी मेडिकल कॉलेज के छात्र शामिल हैं।


