सच को सच और गलत को गलत बताने का जीवट ही पत्रकारों को ऊर्जावान बनाए रखता है। रेडियो, अखबार से शुरू हुई पत्रकारिता इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से होते हुए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आ पहुंची है। ऐसे समय में कि जब प्रिंट मीडिया आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहा है, कई बड़े समाचार पत्रों ने अपना प्रिंट ऑर्डर कम कर दिया है; आप द्वारा साप्ताहिक अखबार ‘संगठन भारत’ का सतत प्रकाशन चनौतीपूर्ण किंतु प्रशंसनीय है।
आज कुछ ही साप्ताहिक अखबार ऐसे हैं जो आर्थिक परिस्थिति डवांडोल होने के बावजूद ईमानदारी से अपना कार्य कर रहे हैं। आपका अख़बार नये पत्रकारों को एक नई दिशा देगा और सकारात्मक संभावनाओं को तलाशेगा, इसी आशा के साथ ‘संगठन भारत’ की पूरी टीम को वर्धापन दिवस की शुभकामनाएं प्रेषित करता हूं।
शुभम भवतु!
…अभय मिश्र (ब्यूरो चीफ-राष्ट्रीय सहारा)


