spot_img
Homeआर्टिकलऊर्जा भंडारण का नया विकल्प:ग्रीन हाइड्रोजन

ऊर्जा भंडारण का नया विकल्प:ग्रीन हाइड्रोजन

ग्रीन हाइड्रोजन का हरित रूप पर्यावरण के अनुकूल और किफायती है । यह ऊर्जा भंडारण का नया विकल्प बन सकता है । यह शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्यों को पूरा करने में भी सहायक होगा । देश में इलेक्ट्रिक वाहन की लोकप्रियता हाइड्रोजन ऊर्जा पर निर्भर करेगी क्योंकि ग्रीन हाइड्रोजन का सबसे अधिक इस्तेमाल परिवहन क्षेत्र में होगा ।अभी रेलवे, बड़े जहाजों, बसों , ट्रकों आदि में ग्रीन हाइड्रोजन दुनिया के कई हिस्सों में उपयोग में लाई जा रही है ,हालांकि ग्रीन हाइड्रोजन से चलने वाले वाहनों की लोकप्रियता सुरक्षा मानकों, लागत और रीफिलिंग स्टेशन की उपलब्धता पर निर्भर करेगी ।
अमेरिकी ऊर्जा विभाग के मुताबिक 1किलोग्राम हाइड्रोजन गैस 2.8 किलोग्राम गैसोलीन के बराबर होती है इलेक्ट्रोलाइजर 39 किलोवाट इलेक्ट्रिसिटी से 1 किलोग्राम हाइड्रोजन तैयार करता है । देश में मौजूद समय में इलेक्ट्रोलाइसिस द्वारा तैयार हाइड्रोजन की लागत लगभग ₹350 प्रति किलोग्राम आती है। द एनर्जी एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुसार 2050 तक हाइड्रोजन ऊर्जा की खपत में 10 गुना वृद्धि होगी। ऐसे में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से हाइड्रोजन तैयार करने वाली इलेक्ट्रोलाइजर्स ।की उपलब्धता बढ़ानी होगी इसलिए इलेक्ट्रोलाइजर उत्पादन की पीएलआइ स्कीम के दायरे में लाने की मांग लंबे समय से हो रही है ऐसा कर हम हाइड्रोजन उत्पादन की प्रक्रिया को सस्ती कर सकते हैं।
केंद्र सरकार ने हरित हाइड्रोजन नीति के तहत कुछ ठोस कदम उठाए हैं । अब ग्रीन हाइड्रोजन तैयार करने वाली इकाइयां कच्चे माल के रूप में नवीकरणीय ऊर्जा कहीं से और किसी से ले सकती हैं यह कंपनियां सौर या पवन ऊर्जा के संयंत्र भी लगा सकती हैं। हरित अमोनिया के निर्यात के लिए बंदरगाहों के पास बंकर बनाए जा रहे हैं । 25 साल की अवधि के लिए अंतरराष्ट्रीय परीषण शुल्क से छूट देने से राज्यों को काफी मदद मिलेगी। इससे हरित हाइड्रोजन की पहुंच दैनिक जरूरत के कार्यों में संभव हो पाएगी।
हरित हहाइड्रोजन से रोजगार के अवसर सृजित होंगे। हाइड्रोजन एक ज्वलनशील गैस है इसके भंडारण में एक अन्य चुनौती रीफिलिंग में लगने वाला समय है। इलेक्ट्रोलाइसिस प्रक्रिया में लगभग 30 से 35% हाइड्रोजन का नुक़सान होता है। हाइड्रोजन को अमोनिया आदि में तरलीकृत करने की प्रक्रिया में 13 से 25 प्रतिशत ऊर्जा नष्ट होती है। इसी तरह हाइड्रोजन के परिवहन के लिए अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
अमेरिकी ऊर्जा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार ग्रीन हाइड्रोजन के इस्तेमाल में सुरक्षा मानकों को और अधिक प्रभावी बनाना होगा। हाइड्रोजन की ज्वलनशीलता और अल्पभार के कारण इसके उपयोग में विशेष सावधानी चाहिए। इसके लिए आवश्यक है कि हाइड्रोजन ऊर्जा के परिवहन के लिए प्राकृतिक गैस पाइपलाइन ग्रिड की तरह स्वतंत्र ग्रिड बनाई जाए।
सरकार रसोई गैस में भी हरित हाइड्रोजन करने की कोशिश में है। लेकिन इसके साथ गैस चूल्हे में भी बदलाव करने होंगे। 2034 35 का 75% उर्वरक उद्योग में भी पर्यावरण हाइड्रोजन का इस्तेमाल होने लगेगा ।सरकार पीएनजी में भी 15%हरित हाइड्रोजन मिलाए जाने की मंजूरी देती है तो इससे हाइड्रोजन ऊर्जा की खपत बढ़ेगी ।हाइड्रोजन के हरित रूप को विकसित कर हम वैश्विक जलवायु प्रतिबद्धताओं को भी समय पर पूरा कर पाएंगे।
भारत ने इस दशक के अंत तक 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इससे देश में ऊर्जा का यह टिकाऊ संसाधन जीवाश्म ईंधन का विकल्प बनेगा। ऊर्जा आत्मनिर्भरता की इस यात्रा सौर और पवन ऊर्जा के साथ हाइड्रोजन ऊर्जा की विशेष भूमिका होगी। हम अपनी उर्जा जरूरत को पूरा करने के लिए लगभग ₹12 लाख करोड़ सालाना खर्च करते हैं। ऐसे में ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन बढ़ने से ऊर्जा सुरक्षा एवं निर्भरता का लक्ष्य हासिल होगा, वही हरित अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।

नन्दिनी रस्तोगी ‘नेहा’
मेरठ

RELATED ARTICLES

Most Popular

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com