10 साल बाद मिलेगा एमएमसी में पंजीकरण
मुंबई(सं.भा.): महाराष्ट्र के होम्योपैथी चिकित्सकों को 10 साल के लंबे इंतजार के बाद बड़ी राहत मिली है। राज्य के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने हाल ही में एक अहम फैसला लेते हुए आधुनिक फार्मेसी में प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम (सीसीएमपी) पूरा कर चुके चिकित्सकों को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (एमएमसी) में स्वतंत्र पंजीकरण की अनुमति दे दी है। इस फैसले से उन 7,600 चिकित्सकों को लाभ होगा, जिन्होंने 2014 से यह पाठ्यक्रम पूरा किया है।
कानूनी लड़ाई के बाद मिली स्वीकृति
यह फैसला एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आया है। साल 2014 में राज्य सरकार ने सीसीएमपी पाठ्यक्रम पूरा कर चुके होम्योपैथी चिकित्सकों को एमएमसी में एक अलग पंजिका में पंजीकरण की स्वीकृति दी थी। हालांकि, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने इस फैसले को न्यायालय में चुनौती दी थी। इसके बाद, सरकार ने विधि एवं न्याय विभाग और महाधिवक्ता की राय ली। दोनों विभागों ने माना कि होम्योपैथी चिकित्सकों के लिए एक स्वतंत्र पंजीकरण पंजिका बनाने में कोई कानूनी बाधा नहीं है। इसी राय के आधार पर चिकित्सा शिक्षा विभाग ने आखिरकार इस पंजीकरण को स्वीकृति दे दी है।
परिपत्र वापस, मार्ग साफ
इस फैसले के बाद, राज्य के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 11 जुलाई का वह परिपत्र वापस ले लिया है, जिसमें सीसीएमपी उत्तीर्ण होम्योपैथी चिकित्सकों के एमएमसी में पंजीकरण पर रोक लगाई गई थी।
इस कदम से उत्साहित होम्योपैथी परिषद के प्रशासक, डॉ. बाहुबली शाह, ने कहा, “अंत में सत्य की जीत होती है।” यह फैसला उन हजारों चिकित्सकों के लिए एक बड़ी विजय है जो अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए इस पंजीकरण का इंतजार कर रहे थे।


