मुंबई (सं.भा.): महाराष्ट्र के आगामी अर्थसंकल्पीय अधिवेशन से पहले किसानों के लिए बड़ी राहत की उम्मीदें प्रबल हो गई हैं। बकाया कर्जदार किसानों का विस्तृत ब्योरा जुटाने के लिए राज्य सरकार ने सभी बैंकों और संबंधित संस्थाओं को निर्देश जारी किए हैं, जिससे कर्जमाफी को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुति सरकार ने जून 2025 तक बकाया रखने वाले किसानों की सटीक जानकारी ‘शिंदे समिति’ को उपलब्ध कराने को कहा है। प्रशासनिक स्तर पर जिला बैंकों, सेवा सहकारी सोसायटियों, सचिवों, बैंक निरीक्षकों और शाखा अधिकारियों के माध्यम से डेटा संकलन की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। सहनिबंधक और निबंधक कार्यालयों के अधिकारी भी इस कार्य में सहयोग कर रहे हैं, ताकि आंकड़ों की शुद्धता सुनिश्चित की जा सके।
सूत्रों के अनुसार, यह कवायद संभावित कर्जमाफी के वित्तीय प्रभाव का आकलन करने के उद्देश्य से की जा रही है। यदि सरकार कर्जमाफी जैसे बड़े फैसले पर विचार करती है, तो उसके लिए आवश्यक बजटीय प्रावधान तय करने में यह आंकड़े निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
राज्य का बजट सत्र 23 फरवरी से 25 मार्च 2026 तक मुंबई में आयोजित होगा, जबकि 6 मार्च को राज्य का बजट पेश किया जाएगा। माना जा रहा है कि डेटा सत्यापन और समिति की रिपोर्ट के बाद मंत्रिमंडल की बैठक में इस विषय पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से प्राकृतिक आपदाओं, अनियमित मौसम और कृषि उपज के दामों में उतार-चढ़ाव के कारण किसान आर्थिक दबाव झेल रहे हैं। ऐसे में कर्जमाफी या अन्य वित्तीय राहत की घोषणा को किसानों के लिए बड़ा सहारा माना जा रहा है। अर्थसंकल्पीय अधिवेशन की पृष्ठभूमि में चल रही इन तैयारियों ने किसानों के साथ-साथ राजनीतिक और आर्थिक हलकों में भी उत्सुकता बढ़ा दी है। अब सबकी निगाहें 6 मार्च को पेश होने वाले बजट और सरकार के संभावित फैसले पर टिकी हैं।


