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महाराष्ट्र को भिखारी मुक्त बनाने का निर्देश, राज्य अन्न आयोग सख्त

मुंबई (सं.भा.) महाराष्ट्र राज्य अन्न आयोग ने राज्य में तेजी से बढ़ रही भिक्षावृत्ति पर गंभीर चिंता जताते हुए महाराष्ट्र सरकार को कड़े निर्देश दिए हैं। आयोग ने साफ कहा है कि महाराष्ट्र को भिखारी मुक्त बनाने के लिए अब ठोस और प्रभावी कार्ययोजना लागू करनी होगी, क्योंकि मौजूदा व्यवस्थाएं जमीन पर असरदार साबित नहीं हो रही हैं।
आयोग द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य में 24 हजार से अधिक लोग भिक्षावृत्ति के सहारे जीवन यापन कर रहे हैं, जो सरकार की योजनाओं और पुनर्वास प्रणाली पर सवाल खड़े करता है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कई पात्र लोग सरकारी योजनाओं से वंचित हैं, जबकि पुनर्वास कार्यक्रम अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहे हैं।
आयोग ने जिला स्तर पर निगरानी तंत्र को कमजोर बताते हुए बायोमेट्रिक सिस्टम में आ रही तकनीकी दिक्कतों को भी बड़ी बाधा बताया है। निर्देश दिया गया है कि यदि बायोमेट्रिक व्यवस्था प्रभावी नहीं है, तो वैकल्पिक पहचान प्रणाली लागू की जाए, ताकि जरूरतमंदों तक योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जा सके।
रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि भीख मांगना और देना दोनों ही कानूनन दंडनीय अपराध हैं। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 और भिक्षावृत्ति प्रतिबंध कानून लागू होने के बावजूद बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, मंदिर और अन्य भीड़भाड़ वाले स्थानों पर भिखारियों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय बनी हुई है।
आयोग ने राज्य सरकार को सुझाव दिया है कि “भीख मत दो, पुनर्वास में सहयोग करो” जैसे संदेश के साथ राज्यव्यापी जनजागरण अभियान चलाया जाए। साथ ही सार्वजनिक स्थलों पर हेल्पलाइन नंबर का व्यापक प्रचार किया जाए और जमीनी स्तर पर सर्वे कर यह सुनिश्चित किया जाए कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में जरूरतमंदों तक पहुंच रहा है।
आयोग ने इंदौर मॉडल का उदाहरण देते हुए कहा कि सख्त कानून पालन, जनजागृति और प्रभावी पुनर्वास के जरिए भिक्षावृत्ति पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। इसके साथ ही जिलाधिकारियों को इस दिशा में स्पष्ट और सख्त निर्देश देने की जरूरत बताई गई है।
आयोग ने यह भी सिफारिश की है कि अन्य राज्यों से आए भिखारियों की पहचान कर उन्हें उनके गृह राज्य वापस भेजने की व्यवस्था की जाए। कुल मिलाकर आयोग ने सरकार को स्पष्ट संदेश दिया है कि अब समय आ गया है जब भिक्षावृत्ति पर निर्णायक कार्रवाई कर राज्य की छवि और सामाजिक व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए।

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