आज महाराष्ट्र में हजारों नहीं बल्कि लाखों युवा अपनी आजीविका के लिए रिक्शा चलाने पर निर्भर हैं। चूंकि सरकार रोज़गार नहीं दे रही है, इसलिए ग्रेजुएट और पढ़े-लिखे युवाओं को दिन-रात रिक्शा चलाते देखा जा सकता है। अब सरकार ने फैसला किया है कि ओला, उबर और ‘रैपिडो ऐप’ के ज़रिए बाइक टैक्सी सेवाएं शुरू की जाएंगी। इन ‘रैपिडो’ बाइक टैक्सियों का सबसे ज़्यादा असर कई शहरों के पर्यटन स्थलों पर रिक्शा चालकों पर पड़ेगा। ‘रैपिडो’ बाइक टैक्सियों को लेकर परिवहन मंत्रालय का फ़ैसला राज्य भर के बेरोजगार मराठी रिक्शा चालकों को आत्महत्या की ओर धकेल रहा है। एक पत्र के माध्यम से परिवहन मंत्री से अपील की गई है कि रैपिडो, ओला और उबर के चलते राज्य में हजारों की संख्या में ऑटो रिक्शा चला रहे मराठी युवकों को आजीविका से वंचित करना उचित नहीं है। पत्र में लिखा कि महोदय, राज्य के कुछ मंत्रियों के ‘रैपिडो’ कंपनी के साथ वित्तीय और व्यावसायिक संबंध हैं। ‘रैपिडो’ ने अब तक दही हांडी, गणेशोत्सव और कुछ मंत्रियों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों को प्रायोजित किया है और करोड़ों रुपये दिए हैं। कुछ मंत्रियों को चुनाव के लिए भी धनराशि दी है। इसलिए ऐसा लगता है कि हजारों रिक्शा चालकों को इनके नाम पर फंसाकर एहसान चुकाने की कोशिश की जा रही है। पत्र में यह भी कहा गया है कि जब महाराष्ट्र के वर्तमान उपमुख्यमंत्री का मूल पेशा ही ‘रिक्शा चालक’ है, तो इस राज्य के रिक्शा चालकों की आजीविका छीनना उचित नहीं है। पत्र के मुताबिक मराठी युवा अपनी आजीविका को लेकर चिंतित हैं। रैपिडो, ओला और उबर के ज़रिए बाइक टैक्सी सेवाओं को मंज़ूरी देने के सरकार के फैसले पर भी चिंता जताई गई और कहा गया है कि इस कदम से मौजूदा ऑटो-रिक्शा ऑपरेटर सीधे तौर पर प्रभावित हो सकते हैं। प्रस्तावित बाइक टैक्सी सेवाओं को लेकर ऑटो-रिक्शा चालकों में काफी नाराजगी है और उनके संगठन इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए परिवहन मंत्री से मिलने की कोशिश कर रहे हैं। ऑटो-रिक्शा चालकों ने अपनी चिंताओं की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए 10 अगस्त को नासिक से मंत्रालय तक मार्च करने की योजना बनाई थी, लेकिन उन्हें विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई। सवाल किया गया है कि क्या रिक्शा चालकों को लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी चिंताएं उठाने से रोका जाना चाहिए और सरकार से उनके प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करने का आग्रह नहीं किया जाना चाहिए। हाल ही में केंद्र सरकार पर महाराष्ट्र के सहकारी क्षेत्र के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया था। 20 अगस्त को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 के पारित होने और मुंबई में राष्ट्रीय शहरी सहकारी वित्त विकास निगम (एनयूसीएफडीसी) कार्यालय के उद्घाटन पर चिंता व्यक्त की थी। इस पत्र की प्रति मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राष्ट्रीय सहकारी समिति अध्यक्ष शरद पवार को भी भेजी गई थी। जिसमें शहरी सहकारी बैंकिंग परिसंपत्तियों से संबंधित मंत्रालय के हालिया निर्णयों पर अपनी प्रमुख आपत्तियां रखी गई थीं। यह पत्र जानबूझकर मराठी में लिखा गया है ताकि जनता समझ सके कि उसके शब्दों में, महाराष्ट्र के शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के साथ किस प्रकार ‘अन्याय किया जा रहा है।’ आरोप यह भी लगाया जा रहा है कि विधेयक जल्दबाजी में पारित किया गया था और एनयूसीएफडीसी के माध्यम से महाराष्ट्र और गोवा के शीर्ष शहरी सहकारी बैंक की संपत्ति को उसके सदस्यों की सहमति के बिना जब्त कर लिया गया था। इसे महाराष्ट्र के सहकारी आंदोलन पर सीधा हमला बताया गया था। इस संबंध में अब सरनाइक से अपील की है कि वे इस पॉलिसी पर फिर से विचार करें और राज्य में बाइक टैक्सी सर्विस को बढ़ाने से पहले ऑटो-रिक्शा ड्राइवरों की चिंताओं पर ध्यान दें। 2025 में, महाराष्ट्र ने राज्य में गैर-कानूनी बाइक टैक्सी सर्विस के खिलाफ सख्त कदम उठाए थे। मंत्री सरनाइक ने इस बात पर जोर दिया कि कमर्शियल तौर पर गाड़ियां चलाने के लिए सही परमिट की जरूरत होती है। इस मुहिम के तहत, एक घटना में 138 जगहों पर छापेमारी करके 72 गाड़ियां ज़ब्त की गईं और आरटीओ व पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई की गई। खास बात यह है कि मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 की धारा 93 के तहत, किसी भी पैसेंजर ट्रांसपोर्ट सर्विस को चलाने के लिए वैलिड परमिट लेना ज़रूरी है। हालांकि, यह पाया गया कि कुछ ऐप-बेस्ड कंपनियां और ड्राइवर इन नियमों का खुलेआम उल्लंघन कर रहे हैं और गैर-कानूनी ट्रांसपोर्ट एक्टिविटीज़ में शामिल हैं।


