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जीव अपनी चेतना के अनुसार ही रामकथा समझता है – प्रेमभूषण महाराज

वसई (सं.भा.): “आओ गायें रामकथा घर-घर में” आध्यात्मिक आंदोलन की देश-विदेश तक अलख जगाने वाले, मानस के सिद्ध साधक, व्यवहार घाट के ओजस्वी प्रवक्ता, क्रांतिकारी संत प्रेममूर्ति पूज्यश्री प्रेमभूषण महाराज के व्यासत्व में 1 मार्च तक वसई-पूर्व स्थित वसंत नगरी ग्राउंड में नौ दिवसीय मानस महाकुंभ में रामकथा का आयोजन किया गया है।

पूज्यश्री प्रेमभूषण महाराज ने कहा कि सनातन संस्कृति में विवाह के समय तीन पीढ़ियों का परिचय जाना जाता है और चार पीढ़ियों तक उन संबंधों में न्यौता-व्यवहार चलता है। उसी प्रकार रामचरितमानस की भी एक अखंड परंपरा है। यह रामकथा भगवान शिव द्वारा माता पार्वती से कही गई और बाद में परंपरागत रूप से अनेक वक्ताओं द्वारा रामकथा-रसिकों को सुनाई जाती रही है। जीव अपनी चेतना के अनुसार ही रामकथा को समझ पाता है। साधु को प्रत्येक व्यक्ति में सज्जनता दिखाई देती है, और जिसे हर व्यक्ति में दुर्जनता ही दिखे, तो मान लेना चाहिए कि उससे बड़ा दुर्जन कोई नहीं। संसार में परमात्मा द्वारा रचित प्रत्येक जीव में कोई-न-कोई विशेष गुण अवश्य होता है; इसी भाव से सबके साथ हमारा विचार और व्यवहार होना चाहिए। रामकथा सुनकर यदि उसका आचरण किया जाए, तभी आयोजन की सफलता मानी जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि रामचरितमानस अपनी लोकभाषा में रचित है। इसमें अवधी, भोजपुरी, प्रतापगढ़ी, जौनपुरी, बनारसी ठाठ सहित बुंदेली पुट की मधुरता है, इसलिए यह जन-जन को प्रिय है।

उल्लेखनीय है कि समाजसेवक बिजेन्द्र रामचंद्र सिंह व उनकी धर्मनिष्ठ पत्नी श्रीमती मीरा बिजेन्द्र सिंह के संकल्प से आयोजित यह मानस महाकुंभ पाँचवीं दिव्य श्रीरामकथा है।

रामकथा में श्रोताओं की अपार भीड़ के बीच नगरसेवक अशोक शेलके, अमित राठौर, राजेश मिश्र, गणेश अग्रवाल, अविनाश मिश्रा, आर. डी. सिंह, अमित सिंह मास्टर, सनी सिंह, विशाल सिंह, अशोक तिवारी, समाजसेविका सुधा दूबे, निशा शर्मा, प्रिया सिंह, रेखा गुप्ता, सरिता चौबे तथा कथा-व्यवस्था संभालने वाले प्रिंस बिजेन्द्र सिंह आदि ने भी मानस महाकुंभ में अवगाहन कर पुण्य अर्जित किया।

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