मुंबई (सं. भा.) छात्रों की सुरक्षा और उनके बेहतर भविष्य को लेकर बीएमसी की शिक्षा समिति ने बड़ा कदम उठाया है। गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों के खिलाफ सख्त नीति बनाने और तत्काल कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
शुक्रवार को हुई शिक्षा समिति की बैठक में मुंबई में संचालित 164 अवैध स्कूलों का मामला प्रमुखता से सामने आया। समिति की अध्यक्ष राजेश्री शिरवडकर ने स्पष्ट कहा कि केवल नोटिस जारी करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि इन स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होने दी जाएगी और जरूरत पड़ने पर उनकी जिम्मेदारी बीएमसी उठाएगी।
बैठक के दौरान भाजपा नगरसेवक नील सोमैया ने अवैध रूप से संचालित स्कूलों पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि बिना अनुमति स्कूल चलाना गंभीर अपराध है और ऐसे संचालकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जाने चाहिए। उनका कहना था कि यह छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। वहीं शिवसेना (उद्धव) के नगरसेवक प्रमोद सावंत ने बहुमंजिला अवैध स्कूल भवनों की खराब गुणवत्ता को छात्रों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया।
भाजपा नगरसेविका स्वप्ना म्हात्रे ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो ऐसे स्कूलों की संख्या तेजी से बढ़कर 600 तक पहुंच सकती है।

बैठक में यह भी सामने आया कि कई स्कूलों के पास जरूरी फायर ऑडिट और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) तक नहीं हैं। कुछ स्कूल झोपड़पट्टी क्षेत्रों में बहुमंजिला इमारतों में संचालित हो रहे हैं, जिससे सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शिक्षा विभाग की उपायुक्त प्राची जांभेकर ने जानकारी दी कि 164 में से 48 स्कूलों के मान्यता प्रस्ताव सरकार को भेजे गए हैं। वहीं बीएमसी की पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) नीति को लेकर भी बैठक में विरोध के स्वर उठे।
समिति ने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में अवैध स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि छात्रों को सुरक्षित माहौल में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।


