मुंबई (सं. भा.) राज्य की परिवहन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, सुरक्षित और यात्रियों के लिए सहज और अनुकूल बनाने के उद्देश्य से आरटीओ से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया गया है। महाराष्ट्र सरकार ने मोटर वाहन नियम, 1989 के कुछ महत्वपूर्ण प्रावधानों में संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसके तहत ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य किया जा सकता है।

जानकारी के मुताबिक, प्रस्तावित संशोधन के तहत सार्वजनिक सेवा वाहनों के लिए परमिट और ऑथराइजेशन जारी करते समय आवेदकों के चरित्र और पृष्ठभूमि की जांच के साथ उनके मराठी भाषा ज्ञान का भी मूल्यांकन किया जाएगा। परिवहन आयुक्त द्वारा तैयार किया गया प्रस्ताव गृह विभाग को भेजा जा चुका है और ड्राफ्ट अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।
नए प्रावधान लागू होने के बाद ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों को न केवल परमिट प्राप्त करने के लिए बल्कि लाइसेंस के नवीनीकरण के समय भी मराठी भाषा का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। सरकार का मानना है कि इससे चालक और यात्रियों के बीच संवाद बेहतर होगा, जिससे सेवा की गुणवत्ता में सुधार आएगा और यात्रियों को अधिक सहज अनुभव मिलेगा।
विभाग ने इस मसौदा नियम पर आम नागरिकों, परिवहन संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। अधिसूचना जारी होने के 30 दिनों के भीतर प्राप्त प्रतिक्रियाओं पर विचार कर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि यह पहल सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को अधिक सुलभ, सुरक्षित और यात्रियों के लिए सहज और अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे स्थानीय भाषा को बढ़ावा मिलेगा और यात्रियों को बेहतर, मैत्रीपूर्ण सेवा मिल सकेगी।


