
मुंबई (सं.भा.)। मालाड पश्चिम के राथोड़ी से लेकर मढ तक भू माफियाओं द्वारा जमीनों की खरीदी – बिक्री का अवैध धंधा पूरे जोर शोर से किया जा रहा है। इन्ही भू माफियाओंमें एक नाम आता है देवी प्रसाद वर्मा का। वर्मा ने अब तक न जाने कितने एकड़ की जमीन सिर्फ ‘एग्रीमेंट फोर सेल’ और ‘पावर ऑफ अटॉर्नी’ के तहत खरीद – बेच कर सरकार की तिजोरी में एक भी पैसा नहीं भरता है।
बता दें कि देवीप्रसाद वर्मा सरकारी जमीन को बेचने के जुर्म में जेल जा चुका है। इसने एरंगल गांव के क्षेत्र में आने वाले धारोली गांव में भी आदिवासियों की कई एकड़ जमीन सिर्फ ‘एग्रीमेंट फोर सेल’ और ‘पावर ऑफ अटॉर्नी’ के तहत खरीद कर लोगों को बेच चुका है। इन्ही जमीनों में एक जमीन वहां वर्मा ने आदिवासी से २०१२ में खरीदा था। इस जमीन के ७/१२ के अनुसार सीटीएस नंबर ९६ और ९७ है। इस जमीन की रजिस्ट्री वर्मा ने नहीं कराई है जिससे सरकार को मिलने वाला लाखों रुपए इसने डकार लिए हैं। इतना ही नही इस जमिन पर आम का बगीचा लगा था जिसे इसने मनपा पी उत्तर विभाग के गार्डेन डिपार्टमेंट के अधिकारियों कि मिली भगत कर उन हरे भरे पेड़ों को काटने में भी कामयाब रहा है। इसी प्रकार वर्मा ने राथोड़ी गांव में भी जमीन खरीदी है। बताया जाता है कि सरकार को पैसा न देना पड़े इस वजह से उसने जमीन मालिक से ‘एग्रीमेंट फोर सेल’ और ‘पावर ऑफ अटॉर्नी’ लेकर दूसरों को उक्त जमीन इसी तरह बेच रहा है। वर्मा ने अब तक इस क्षेत्र में दर्जानों एकड़ जमीन इसी तरह खरीदी – बिक्री कर सरकार की तिजोरी में करोड़ों का चुना लगाने का काम किया है। वर्मा द्वारा ‘एग्रीमेंट फोर सेल’ और ‘पावर ऑफ अटॉर्नी’ के तहत लोगों को बेचे गए ऐसे कई कागजात परिवर्तन फाऊंडेशन के कार्यालय में मौजूद है। फाऊंडेशन इसी को आधार बना कर जल्द ही वर्मा के खिलाफ कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर उसकी पोल खोलने का काम करने वाली है


