मीरा रोड (सं.भा.) सावन की फुहारों और लोक संस्कृति की मिठास के बीच मीरा रोड में रविवार को संगीत प्रेमियों को कजरी के पारंपरिक रंग से रूबरू होने का अवसर मिला। ‘स्वर संगम फाउंडेशन’ और ‘उत्तर भारतीय मंच’ के संयुक्त आयोजन में लोकगीतों की ऐसी महफिल सजी, जिसमें भोजपुरी और अवधी अंचल की सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाई दी। विरंगुला केंद्र में आयोजित इस कार्यक्रम में कलाकारों की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को देर तक बांधे रखा। कजरी के पारंपरिक गीतों पर सभागार तालियों से गूंजता रहा। करीब तीन घंटे चले इस आयोजन में लोक संगीत की पुरानी परंपरा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत उत्तर भारतीय मंच के अध्यक्ष धर्मेंद्र चतुर्वेदी द्वारा कलाकारों के स्वागत के साथ हुई। इस अवसर पर शैलेश सिंह ने कजरी के सांस्कृतिक महत्व और सावन से इसके गहरे संबंध पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि उत्तर भारतीय लोक परंपरा में मौसम के अनुसार गीतों की अलग-अलग विधाएं प्रचलित रही हैं और कजरी सावन की प्रमुख लोक विधा है।
इसके बाद प्राचार्य बृजेश सिंह, अवधेश विश्वकर्मा, राजेश सिंह और एडवोकेट एच.आर. शर्मा ने कजरी की विभिन्न प्रस्तुतियां दीं। ‘घिर आई बदरिया’, ‘मिर्जापुर कइलै गुलजार हो’, ‘कचौड़ी गली सून कइलै बलमू’ और ‘अबकी ना जाइब सावन में नैहरवां’ जैसे गीतों ने माहौल को पूरी तरह लोक रंग में रंग दिया।
संगीत में बृजेश सिंह ने हारमोनियम, वैभव सिंह ने तबला और फिरोज खान ने ढोलक पर संगत की। मंजीरे पर रामभवन त्रिपाठी के साथ महज पांच वर्षीय विदेह राज सिंह ने भी प्रस्तुति देकर खूब तालियां बटोरीं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. हरि प्रसाद राय ने किया। समापन पर उन्होंने कलाकारों, साजिंदों और उपस्थित श्रोताओं के प्रति आभार जताया।


