मुंबई (सं.भा.) अंतरराष्ट्रीय हालातों के चलते पैदा हुए गैस संकट ने अब मुंबई में गरीबों की जिंदगी पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है। कमर्शियल गैस सिलेंडर की किल्लत के कारण सस्ता खाना देने वाले छोटे होटल और खान-पान स्टॉल बंद हो रहे हैं।
इससे दिहाड़ी मजदूर, सिक्योरिटी गार्ड और ऑटोरिक्शा चालकों के सामने भोजन और रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है, जिसके चलते अब मजदूरों का पलायन भी शुरू हो गया है।
मालाड, मालवणी, कांदिवली, चारकोप, बोरीवली और दहिसर जैसे इलाकों में कमर्शियल गैस सिलेंडर की भारी कमी देखी जा रही है। हालात यह हैं कि कई छोटे होटल और ढाबे गैस न मिलने के कारण पूरी तरह बंद हो चुके हैं। वहीं जो होटल खुले हैं, वे ब्लैक में ऊंचे दामों पर सिलेंडर खरीदकर किसी तरह संचालन कर रहे हैं, जिसके चलते नाश्ता और भोजन के दाम में भारी बढ़ोतरी हो गई है।

इसका सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ा है, जो रोज कमाते और उसी से अपना पेट भरते हैं। सिक्योरिटी गार्ड, दिहाड़ी मजदूर और ऑटोरिक्शा चालक जैसे हजारों लोग सस्ते होटलों के खाने पर निर्भर रहते हैं, लेकिन अब उनके सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया है।

परिवर्तन फाउंडेशन के अध्यक्ष राज किशोर तिवारी के अनुसार, गैस संकट के कारण अधिकांश छोटे होटल बंद हो गए हैं, जिससे मजदूर वर्ग की स्थिति बेहद कठिन हो गई है। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में मजदूर, सिक्योरिटी गार्ड और अन्य कामगार अपने गांवों की ओर लौटने लगे हैं।
इस पलायन का असर अब शहर की व्यवस्था पर भी दिखने लगा है। कई स्थानों पर सिक्योरिटी गार्ड और मजदूरों की कमी महसूस की जा रही है, जिससे हाउसिंग सोसाइटी, निर्माण कार्य और छोटे उद्योग प्रभावित हो रहे हैं।
अगर जल्द ही कमर्शियल गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो यह संकट और गहराएगा और मुंबई की आर्थिक व सामाजिक व्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है।


