- कोरोना मरीजों के घरों को सेनेटाइज करने के नाम पर किया घोटाला
मुंबई (सं. भा.)। कांदिवली पश्चिम का आर/साउथ वार्ड के घनकचरा विभाग के सहायक अभियंता प्रशांत मांजरेकर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए काली कमाई में पूरी तरह डूबे हुए हैं। कांदिवली पूर्व और पश्चिम में ‘स्वच्छता दूत’ के माध्यम से भ्रष्टाचार करने वाले सहायक अभियंता मांजरेकर के काली कमाई का एक और कांड का पता चला है।
जानकारी देने वाले सूत्र कि माने तो कोरोना काल के दौरान भी मनपा आर/साउथ वार्ड के घनकचरा विभाग के सहायक अभियंता प्रशांत मांजरेकर ने जमकर चांदी काटी यानी भ्रष्टाचार किया। सूत्र का कहना है कि कोविड काल में कोरोना का मरीज मिलने के बाद बिल्डिंग या स्लम की चाल को पूरी तरह प्रतिबंधित कर किसी के भी आने जाने की मनाई थी। तब मनपा के जिस वार्ड कार्यालय के अंतर्गत कोरोना के मरीज जहां मिलते थे वहां सेनेटाइजर का छिड़काव करना अनिवार्य था।

मनपा आर/साउथ वार्ड कार्यालय में भी सेनेटाइज करने के लिए उस दौरान बड़े पैमाने पर लेबरों को रखा गया था। या यह कहें कि कागज पर लेबरों की जो संख्या बताई गई थी उससे कहीं कम लेबर हकीकत में सेनेटाइजेशन का काम करते थे। सूत्र का यह भी कहना है कि सहायक अभीयंता मांजरेकर ने उस दौरान सेनेटाइज करने के लिए लेबर का कांट्रेक्ट सीधे अपने खास लोगों को दिया था। अब सवाल यह उठता है कि कागज पर जिन लेबरों को घनकचरा विभाग द्वारा दिखाए गए थे वह कौन और कहां के थे। कोविड काल में मनपा द्वारा किए गए भ्रष्टाचार को लेकर मनपा के अधिकारियों की जांच चल रही है। ‘संगठन भारत’ अखबार का मानना है कि भ्रष्टाचार के इस जांच में सहायक अभियंता प्रशांत मांजरेकर जैसे भ्रष्ट अधिकारियों को भी शामिल कर इनके अवैध संपत्तियों की जांच करनी चाहिए।

खबर देने वाले सूत्र ने बताया कि कागज पर मांजरेकर ने सेनेटाइज करने के लिए जितने लेबरों को दिखाया है। उन सभी के पीएफ की जांच करनी चाहिए। इन लेबरों के नाम पर जिन बैंकों में खाते खोले गए है वहां का स्टेटमेंट निकालकर गहराई से जांच करने पर सहायक अभियंता प्रशांत मांजरेकर जैसे भ्रष्ट मनपा अधिकारियों के भ्रष्टाचार की पोल खुल सकेगी।


