समाज की नब्ज को समझना और उसकी आवाज को बुलंद करना हर किसी के बस की बात नहीं होती। लेकिन ‘संगठन भारत’ ने पिछले 15 वर्षों में यह साबित किया है कि सच्ची पत्रकारिता सिर्फ शब्दों का खेल नहीं, बल्कि समाज की दबी कुचली आवाज को प्रखरता से उठाना भी एक सच्ची जिम्मेदारी होती है। यह अखबार उन अनगिनत आवाजों का मंच बना, जिन्हें अक्सर दबा दिया जाता है या नजरअंदाज कर दिया जाता है।
इन वर्षों में ‘संगठन भारत’ ने न सिर्फ समाज मे सताए और दबाए गए लोगों की खबरें छापीं, बल्कि लोगों के दर्द को महसूस कर उनके संघर्ष को शब्द दिए और उनके हक के लिए मजबूती से खड़ा रहा। यह सफर आसान नहीं था, धमकियां मिलीं, दबाव बने, रास्ते में कई मुश्किलें आईं, लेकिन ‘संगठन भारत’ कभी रुका नहीं, कभी झुका नहीं।
इसकी कलम की स्याही ने समाज के प्रति जिम्मेदारी, संवेदना और सत्य रूपी अटूट विश्वास को कायम रखा है। यही कारण है कि यह अखबार आज सिर्फ एक प्रकाशन नहीं, बल्कि लोगों के भरोसे और उम्मीद का प्रतीक बन चुका है।
आज जब ‘संगठन भारत’ 15 वर्षों की इस गौरवपूर्ण यात्रा को पूरा कर 16वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, तो यह केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि उन सभी लोगों की जीत है, जिन्होंने सच पर विश्वास किया। इस अखबार ने हर परिस्थिति में निष्पक्षता को अपना धर्म माना है, साथ ही इसे उन पाठकों का आशीर्वाद भी प्राप्त है, जिन्होंने 15 वर्षों के इस सफर में हर कदम पर साथ दिया है।
मैं ‘संगठन भारत’ को इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। कर्ताधर्ता राजकिशोर तिवारी और उनकी पूरी टीम को बधाई व शुभकामनाएं देता हूं, जिन्होंने इस अखबार को एक मजबूत पहचान दिलाई। मेरी कामना है कि यह इसी तरह समाज की सच्ची आवाज बनकर आगे बढ़ता रहे और पत्रकारिता के उच्च आदर्शों को जीवित रखे।
अजय सिंह, वरिष्ठ पत्रकार


