मोहब्बत का सरोकार
मान भी जाओ की मोहब्बत का सरोकार चले ।
मुश्किलों मे भी हमारे प्यार का कारोबार चले।
सताया बहुत है कोरोना ने लाख चाहे जितना।
मुस्कुरा भी जाओ की जालिम न कोई वार चले।
यूं तो गुल खिलते है बहारो मे रिवाज पुराना है।
खिलखिला भी जाओ बेमौसम मेरा प्यार पले।
हुस्न तुमसा नहीं जमाने में ऐतवार कर लो।
बहार बनके आओ जैसे मेरा दिलदार चले।
श्याम कुंवर भारती


